֍:खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग§ֆ:उल्लेखनीय है कि जमीन में भारी धातुओं के पहुंचने के सोर्सेज खनन,औद्योगिक उत्सर्जन,कचरे का अनियोजित निस्तारण के अलावा खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का बेतहाशा प्रयोग भी है. खासकर फास्फेटिक उर्वरकों का. इसका एक मात्र हल है जैविक या प्राकृतिक खेती. ऐसी खेती जो विष रहित हो. पर्यावरण के अनुकूल हो, साथ ही अप्रत्याशित मौसम अधिक गर्मी, सूखा और जलजमाव और पानी के प्रति भी सहनशील. यही वजह है कि योगी सरकार लगातार इस जैविक एवं प्राकृतिक खेती और मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहन दे रही है. यह जन, जमीन और जल के अनुकूल है.§֍:5,000 रुपये के मानदेय पर कृषि सखियों की नियुक्ति§ֆ:बुंदेलखंड और गंगा के तटवर्ती इलाकों के बाद गंगा की सहयोगी नदियों के दोनों किनारों पर भी ऐसी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा. इस खेती के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए प्रति माह 5,000 रुपये के मानदेय पर कृषि सखियों की नियुक्ति की जाएगी. इनको संबंधित जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के एक्सपर्ट प्रशिक्षण देंगे. प्राकृतिक खेती के लिए हर जिले में दो बायो इनपुट रिसर्च सेंटर (बीआरसी) भी खुलेंगे. सरकार की मंशा 282 ब्लाकों, 2144 ग्राम पंचायतों की करीब 2.5 लाख किसानों को इससे जोड़ने की है. खेती क्लस्टर में होगी. हर क्लस्टर 50 हेक्टेयर का होगा. सरकार इस योजना पर अगले दो वर्ष में करीब 2.50 अरब रुपए खर्च करेगी.§मिट्टी में भारी धातुओं की लगातार बढ़ती मात्रा कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा संकट है. एक वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 15 फीसदी खेती लायक जमीन भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुकी है. इसका सीधा प्रभाव करीब 1.4 अरब उन लोगों पर पड़ रहा है जिनका ऐसे क्षेत्रों में अधिक एक्पोजर है. स्ट्डी के मुताबिक ऐसे कई क्षेत्रों की मिट्टी में आर्सेनिक, कैडियम,कोबाल्ट,क्रोमियम, कॉपर,निकल, लेड जैसी खतरनाक धातुओं की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है. यूनिवर्सिटी ऑफ यार्क के जीव वैज्ञानिकों के मुताबिक ये धातुएं भोजन,पानी और हवा के जरिए इंसानों, जानवरों और जलीय जीवों में भी पहुंच रही हैं. इससे लंबे समय में इनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है.

