֍:जिला परिषद सदस्य ने दी जानकारी§ֆ:’किसान तक’ की न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, डिंडोरी के जिला परिषद सदस्य फूलचंद कुर्रम ने अपने इलाके में मोटे अनाज की पारंपरिक खेती के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “यहां कोदो, कुटकी और मक्का जैसी फसलें बड़ी मात्रा में उगाई जाती हैं. हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि इन फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले, साथ ही बजट में ऐसा प्रावधान किया जाए जिससे सरकार को सीधे बिक्री की सुविधा मिल सके.”§֍:क्या है किसानों की मांग?§ֆ:मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में किसान सिंचाई की कमी और जमीन की खराब स्थिति से परेशान हैं. उन्हें अक्सर अपनी फसल स्थानीय व्यापारियों को कम कीमत पर बेचनी पड़ती है. स्थानीय किसान भगवत सिंह परसाटे ने बताया कि पठारी जमीन अन्य फसलों के लिए उपयोगी नहीं होने के कारण यहां मोटे अनाज की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. हम उन्हें व्यापारियों को बेचते हैं, लेकिन हमें उचित मूल्य नहीं मिलता. सरकार को ऐसा कदम उठाना चाहिए कि हमें अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य मिले.§केंद्रीय बजट पेश होने में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है. इसके पहले मध्य प्रदेश के आदिवासी इसाकों में किसानों ने मोटे अनाजों के लिए एमएसपी गारंटी की मांग उठाई है. किसानों का कहना है कि मोटे अनाज जैसे कोदो, कुटकी और मक्के जैसी फसलों के लिए एमएसपी गारंटी कब देगी. डिंडोरी जिले के किसान मुख्य तौर पर बारिश आधारित खेती पर निर्भर हैं. इसे देखते हुए उन्हें अपनी उपजों को उचित मूल्य पर बेचने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

