֍:क्या है सस्टेनेबल एग्रीकल्चर?
§ֆ:सस्टेनेबल एग्रीकल्चर में प्राकृतिक संसाधनों का कुशल उपयोग, रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का कम प्रयोग, जैविक खेती, जल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने जैसी पद्धतियाँ शामिल हैं। इसका मुख्य लक्ष्य उत्पादकता बनाए रखते हुए पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न पहुँचाना है।
§֍:कैसे मजबूत हुई इसकी पहचान?
§ֆ:जलवायु परिवर्तन का दबाव – बढ़ते तापमान और अनिश्चित मौसम के कारण किसानों को टिकाऊ तरीकों की ओर मुड़ना पड़ा।
सरकारी नीतियाँ – भारत सरकार ने परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दिया है।
उपभोक्ता जागरूकता – ऑर्गेनिक और केमिकल-मुक्त उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों को लाभ हुआ।
तकनीकी समाधान – ड्रिप इरिगेशन, वर्मीकम्पोस्टिंग और प्रिसिजन फार्मिंग जैसी तकनीकों ने इसे व्यवहारिक बनाया।
§ֆ:§֍:भारत में सफल उदाहरण
§ֆ:सिक्किम भारत का पहला 100% ऑर्गेनिक राज्य बना।
आंध्र प्रदेश की जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग योजना ने छोटे किसानों की आय बढ़ाई।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रिजेनरेटिव एग्रीकल्चर तेजी से फैल रहा है।
§֍:चुनौतियाँ और भविष्य
§ֆ:हालांकि, छोटे किसानों के लिए संसाधनों की कमी और बाजार तक पहुँच एक बड़ी बाधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सहयोग, निजी निवेश और ग्रामीण शिक्षा से सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को और बढ़ावा मिल सकता है।
§नई दिल्ली, 25 मई 2024 – जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की गिरावट और बढ़ती आबादी के बीच सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (Sustainable Agriculture) आज दुनियाभर में कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता बन गया है। यह एक ऐसी कृषि पद्धति है जो पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक लाभ और सामाजिक समानता को संतुलित करते हुए दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

