֍:आंदोलन पर राकेश टिकैत का बयान §ֆ:बता दें कि पंजाब से हजारों किसानों का जत्था दिल्ली की तरफ कूच कर चुका है. आज यानी की मंगलवार को अंबाला के शंभू बॉर्डर पर इकट्ठा हुए किसानों के जत्थे पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. पुलिस के इस एक्शन के बाद शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों के बीच भगदड़ के हालात बन गए. अभी 5000 किसानों का एक और जत्था शंभू बॉर्डर पर कुछ देर में पहुंचने वाला है.
§֍:इन किसान संगठनों का मिला है समर्थन§ֆ:दरअसल, इस प्रदर्शन में सभी किसान संगठन शामिल नहीं हैं. इतना ही नहीं संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) भी साफतौर पर यह बयान जारी कर चुका है कि उनका इस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि, इस आंदोलन में किसान मजदूर मोर्चा, सरवन सिंह पंढेर की किसान मजदूर संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह, भारतीय किसान यूनियन जनरल सिंह और भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद दिलबाग सिंह और गुरमननित सिंह की प्रोग्रेसिव फार्मर फ्रंट इस आंदोलन में शामिल हैं.
§֍:इन मांगों को लेकर डटे हैं किसान§ֆ:1. किसानों की सबसे खास मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानून बनना है.
2. किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी कर रहे हैं.
3. आंदोलन में शामिल किसान कृषि ऋण माफ करने की मांग भी कर रहे हैं.
4. किसान लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं
5. भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर निकाला जाए.
6. कृषि वस्तुओं, दूध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाया जाए.
7. किसानों और 58 साल से अधिक आयु के कृषि मजदूरों के लिए पेंशन योजना लागू करके 10 हजार रुपए प्रति माह पेंशन दी जाए.
8. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के लिए सरकार की ओर से स्वयं बीमा प्रीमियम का भुगतान करना, सभी फसलों को योजना का हिस्सा बनाना और नुकसान का आकलन करते समय खेत एकड़ को एक इकाई के रूप में मानकर नुकसान का आकलन करना.
9. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को उसी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को दिए गए निर्देशों को रद्द किया जाना चाहिए.
10. कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए.
§किसानों के दिल्ली मार्च और पुलिस के एक्शन के बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने बड़ा बयान दिया है. टिकैत ने कहा है कि ‘दिल्ली चलो मार्च’ का ऐलान किसान यूनियन ने किया है, लेकिन अगर उनके साथ किसी तरह का अन्याय होता है तो देश भर के किसान उनके साथ खड़े होंगे. राकेश टिकैत ने आगे कहा कि किसान अपना पक्ष रखने दिल्ली आ रहे हैं. सरकार को उनकी मांगें सुननी चाहिए.

