ֆ: वक्ताओं ने कहा कि अब तो मीडिया के माध्यम से भी आंकड़े आने लगे है कि पूर्वांचल विधुत वितरण निगम का घाटा पिछले वर्ष से हजारो करोड़ घटा है और राजस्व भी लगभग 1400 करोड़ पिछले वर्ष से बढ़ा है और कर्मचारियों और अधिकारियों ने भी महंगाई भत्ता और इंक्रीमेंट बढ़ने के बाद भी अपने खर्चे में लगभग 1 करोड़ की कटौती की है जिससे ये साफ प्रदर्शित हो रहा है कि इस विभाग के उन्नती के लिए समस्त कर्मचारी और अधिकारी दिन फैट लगे हुए है उसके बाद भी ऊर्जा प्रबन्धन पता नही क्यों बिजली का निजीकरण करने पे आमादा है साथ ही वक्ताओं ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार के रहते हुए सबसे ज्यादा सुधार बिजली व्यवस्था में हो रहा है।
बिजली कर्मचारी और अभियंता माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बिजली व्यवस्था के सुधार में लगातार लगे हुए हैं किंतु पता नहीं क्यों पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने अचानक प्रदेश के 42 जनपदों में बिजली वितरण के निजीकरण की घोषणा कर बिजली कर्मियों को उद्वेलित कर दिया है और अनावश्यक रूप से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है। बिजली कर्मी अभी भी पूरी मेहनत से कार्य कर रहे हैं और निजीकरण के विरोध में सभी ध्यानाकर्षण कार्यक्रम कार्यालय समय के उपरांत कर रहे हैं जिससे बिजली व्यवस्था पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े और उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत ना हो।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन के इस रवैया से पूरे देश के बिजली कर्मचारी और अभियंता आंदोलित हो गए हैं। 13 दिसंबर को उप्र में बिजली के निजीकरण के विरोध में पूरे देश में बिजली निजीकरण विरोधी दिवस मनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और अभियंता भी इस कार्यक्रम को आयोजित कर रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा की दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से वर्ष 2023- 24 में प्रति यूनिट रुपया 4.47 मिल रहा है जबकि निजी क्षेत्र की टोरेंट कंपनी से आगरा शहर में पावर कारपोरेशन को मात्र रुपया 4.36 प्रति यूनिट मिला है। यह आंकड़े साफ तौर पर बता रहे हैं की ग्रामीण क्षेत्र और चंबल के बीहड़ रहते हुए भी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से पावर कारपोरेशन को अधिक पैसा मिल रहा है और टोरेंट को बिजली देने में पावर कारपोरेशन को घाटा हो रहा है, फिर भी निजीकरण के ऐसे विफल प्रयोग को पावर कार्पोरेशन प्रबंधन किस कारण से उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर थोपना चाहता है यह समझ में नहीं आ रहा है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की अरबों रुपए की बेशक कीमती जमीन किस आधार पर मात्र एक रुपए में निजी घरानों को सौंप दी जाएंगी। यह जनता की परिसंपत्ति है। इसके अतिरिक्त अरबों खरबों रुपए की परिसंपत्तियों और कार्यालयों को बिना परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किए किस आधार पर और कितने रुपए में निजी कंपनी को बेचने की तैयारी है ? इन सब बातों से बिजली कर्मचारी और उपभोक्ता बहुत अधिक परेशान और उद्वेलित है। इसीलिए शांति पूर्ण ढंग से ध्यानाकर्षण कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
§विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर समस्त ऊर्जा निगमों सहित वाराणसी के तमाम बिजली कर्मचारी और अभियंता कल 13 दिसंबर को निजीकरण के विरोध में निजीकरण विरोधी दिवस मनाएंगे और कार्यालय समय के उपरांत शाम-5 बजे भिखारीपुर स्थित हनुमानजी मन्दिर पर समस्त बिजलीकर्मी विरोध सभा करेंगे। संघर्ष समिति ने आज समस्त कर्मचारी और अभियंता को लोगो को जागरूक कर कल शाम -बजे से होने वाली सभा मे इक्कट्ठा होने का निर्देश दिया। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन ने अनावश्यक तौर पर निजीकरण का निर्णय लेकर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है। बिजली कर्मचारी शांतिपूर्वक बिजली व्यवस्था बेहतर बनाने में लगे हुए थे लेकिन अब प्रबंधन इसे पटरी से उतार देने पर तुला हुआ है।

