ֆ:धनखड़ ने कहा कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्र की रीढ़ है और इससे देश की औद्योगिक व्यवस्था भी जुड़ी है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध, बागवानी और पशुपालन को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सांसदों, विधायकों और स्वयंसेवी संगठनों से गांवों को गोद लेकर स्थानीय किसान-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने की अपील की।§ֆ:उपराष्ट्रपति ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब किसी भी प्रकार के आतंक को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सीमापार की गई जवाबी कार्रवाई का भी जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए देश के नागरिकों में बढ़ते राष्ट्रगौरव की भावना पर भी प्रकाश डाला।§ֆ:भारत की तेज आर्थिक प्रगति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश एक दशक में 11वीं से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब जर्मनी को पछाड़ने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में तकनीक और नवाचार को अपनाकर किसानों को उद्यमी बनाने की जरूरत बताई और कहा कि किसान अब सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में भी आगे आएं।§ֆ:अंत में, उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों की मेहनत, धैर्य और राष्ट्रभक्ति अतुलनीय है। यदि उन्हें सही दिशा और समर्थन मिले, तो वे 2047 से पहले ही भारत को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं।§मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में आयोजित एग्री-इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए सभी कृषि सब्सिडियों को सीधे उनके खातों में स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में उर्वरक और अन्य इनपुट्स पर दी जाने वाली सब्सिडी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अक्सर अप्रत्यक्ष रूप में दी जाती है। यदि यह सीधे किसानों को मिले, तो प्रत्येक किसान को सालाना ₹35,000 से अधिक की सहायता मिल सकती है। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से इस पर एक विस्तृत अध्ययन कराने का आह्वान किया।

