֍:ठंड से लोगों को हो रही परेशानी§ֆ:इससे नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले निवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि ठंड के कारण पानी के पाइप जम गए हैं, जिससे उन्हें बहते पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है. प्रसिद्ध किशनगंगा नदी, जो इस क्षेत्र के लिए जीवन रेखा काम करती है वो भी जम गई है, जिससे स्थानीय लोगों के सामने चुनौतियां बढ़ गई है.
§֍:युवा उठा रहे मौसम का लुत्फ§ֆ:जमाने वाली ठंड और हड्डियों को हिला देने वाली सर्दी के बीच कश्मीर में आजकल मौसम किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि सोपोर इलाके में पानी की मोटी परत जमी हुई है, जिससे युवा क्रिकेटरों को बर्फ की जमी हुई चट्टानों पर खेलते हुए खुशी हो रही है. ऐसा लग रहा है कि लद्दाख आइस हॉकी के लिए जाना जाता है. वहीं, इलाके के स्थानीय युवाओं ने कहा कि हमने इतने बड़े हिमखंड और जमे हुए पानी की झीलें नहीं देखी हैं. इन बर्फ के चट्टानों पर खेलना उनके लिए बिल्कुल नया है और उन्हें खुशी है कि वो यह अनुभव कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि वो छात्र हैं और इस समय यहां सर्दी है और यह ठंड हमें अपने जीवन का सबसे अच्छा समय दे रहे है, क्योंकि उन्होंने TV पर ऐसी चीजें देखी हैं, लेकिन इन जमी हुई झीलों पर खेलना बेहद रोमांचक है.
§जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी बर्फबारी देखने को मिल रही है. कश्मीर में मौसम के बदलने से ऊपरी पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होने के बाद मौसम ने एक दम से करवट ली है, जिससे पूरी घाटी इस समय बर्फ से ढक गई है. तापमान माइनस से काफी नीचे दर्ज किया जा रहा है. ग्लेशियर, नदियां और डल झील तक जम गई है. इसी बीच जम्मू कश्मीर में चिल्लई कलां की शुरुआत हो गई है. यह लगभग 40 दिन का होता है. इसका दौर 21 दिसंबर से लेकर 31 जनवरी तक रहता है. इसी दौरान गुरेज के सीमावर्ती क्षेत्र में शुक्रवार को -20 डिग्री सेल्सियस का तापमान दर्ज किया गया है.

