֍:किस राज्य में कितनी आईडी?§ֆ:फार्मर रजिस्ट्रेशन यानि फार्मर आईडी के लिए सरकार ने एग्रीस्टैक नाम की मुहिम चलाई है जो पूरी तरह से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है. एग्रीस्टैक के जरिए ही किसानों की रजिस्ट्री की जा रही है और फार्मर आईडी बनाकर दी जा रही है. इसके लिए 2027 तक का एक लक्ष्य तय किया है जिसके तहत 11 करोड़ किसानों को फार्मर आईडी मुहैया कराई जाएगी. इस विशेष आईडी को किसान पहचान पत्र का नाम दिया गया है. जिन 11 राज्यों में फार्मर आईडी बनाने का काम तेजी से चल रहा है उनमें यूपी (120 लाख), महाराष्ट्र (60.50 लाख), मध्य प्रदेश (50.60 लाख), गुजरात (30.90 लाख), आंध्र प्रदेश (20.90 लाख)और राजस्थान (20.20 लाख) के नाम हैं. तमिलनाडु, असम, छ्त्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों ने भी किसानों को फार्मर आईडी देने का काम शुरू कर दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 में 3 करोड़ और वित्त वर्ष 27 में 20 करोड़ किसानों को फार्मर आईडी मिलने का अनुमान है.§֍:क्यों है फार्मर रजिस्ट्रेशन जरूरी?§ֆ:कृषि मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, किसान आईडी बनने के बाद किसानों को लोन मिलना और फसल बीमा कराने जैसा काम आसान हो जाएगा. इसके अलावा पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा डीबीटी के जरिए ट्रैंसफर करने का काम भी आसान हो जाएगा. अभी तक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की राशि देने के लिए एपीआई आधारित सॉफ्टवेयर के जरिए किसानों के लैंड रिकॉर्ड की जांच की जाती है और वेरिफाई होने के बाद किसानों को पीएम किसान स्कीम (PM Kisan yojana) का पैसा दिया जाता है. §देश में फार्मर रजिस्ट्रीय यानि किसान आईडी बनाने के कार्य तेजी से देश के सभी राज्यों में हो रहा है. इसके तहत पर अब लैंड रिकॉर्ड और किसानों के आधार पर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है. इसको लेकर सरकार की ओर से किसानों की रजिस्ट्री की जा रही है जिसे फार्मर रजिस्ट्री (Farmer registry) का नाम दिया गया है. इस रजिस्ट्री के पूरा होने के बाद किसानों को आधार की तरह ही एक नंबर दिया जा रहा है जिसका नाम किसान आईडी है. अभी तक पूरे देश में तकरीबन 360 लाख किसान आईडी बन चुकी हैं, जिसमें यूपी सबसे आगे है.

