उत्तर भारत के बाद अब दक्षिण के किसानों पर भी यूरिया संकट का साया मंडराने लगा है। तेलंगाना के कई जिलों से यूरिया की भारी कमी की खबरें सामने आ रही हैं। महबूबनगर जिले के मकथल कस्बे में किसान पिछले दो दिनों से यूरिया के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं, लेकिन जरूरी खाद अब भी उन्हें नहीं मिल पा रही है। पासबुक हाथ में लिए किसान सुबह-सुबह प्राथमिक कृषि सहकारी समिति के दफ्तर पहुंचते हैं, लेकिन लौटते हैं खाली हाथ।
यूरिया की फिर आई कमी
कतारों में थके-हारे किसानों ने अब अपने पत्थर और चप्पल कतार में रखकर अपनी बारी का प्रतीक बना दिया है। खास बात यह है कि महिला किसान भी इस भीषण गर्मी में घंटों लाइनों में खड़ी रहने को मजबूर हैं।
किसानों का आरोप: गोदामों में है स्टॉक, बाजार में कालाबाजारी
किसानों का आरोप है कि निजी व्यापारी अपने गोदामों में पर्याप्त यूरिया छिपाए बैठे हैं और खुले बाजार में इसे मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। यह संकट राज्य के पशुपालन मंत्री वी. श्रीहरि के निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जिससे किसान और भी आक्रोशित हैं।
हनमकोंडा जिले के परकल कृषि बाजार में भी पुरुषों और महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। एक वायरल वीडियो में महिला किसान कहती नजर आती है, “हम 10 दिन से यूरिया के लिए भटक रहे हैं। अब तक खेतों में बुवाई नहीं कर पाए। सरकार को जल्द फैसला लेना होगा, वरना इस बार खेती नहीं होगी।”
विरोध के बाद वितरण बंद, व्यापारी रडार पर
बुधवार को जब सहकारी समिति किसानों की मांगें पूरी नहीं कर पाई, तो नाराज किसानों ने प्रदर्शन किया और अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद यूरिया का वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया गया। कृषि अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई व्यापारी अवैध रूप से यूरिया बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीति भी गरमाई, बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया षड्यंत्र का आरोप
इस संकट पर सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर किसानों को भ्रमित करने और चुनावी लाभ के लिए ‘कृत्रिम यूरिया संकट‘ खड़ा करने का आरोप लगाया है। पार्टी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए 12.02 लाख मीट्रिक टन यूरिया भेजा है, जबकि मांग सिर्फ 9.5 लाख मीट्रिक टन थी।
अब किसानों की निगाहें सरकार पर
तेलंगाना में खेती का समय सिर पर है, लेकिन खाद नहीं मिलने से किसान असहाय हैं। अब उनकी उम्मीद सरकार और प्रशासन से है कि जल्द कोई समाधान निकाला जाए ताकि खेत सूने न रह जाएं।

