֍:किसानों को दाम बढ़ने का इंतेजार§ֆ:गन्ने की एसएपी पिछले साल ही 400 रुपये क्विंटल तक बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी. हालांकि, अभी तक गन्ना मूल्य 400 पार होना मुश्किल नजर आ रहा है. चीनी उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चीनी मिलें इस साल गन्ना मूल्य बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं. जबकि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल का दाम बढ़ाने की मांग कर रही हैं. भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मांग की है कि बढ़ती महंगाई और लागत को देखते हुए गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और बकाया भुगतान भी ब्याज सहित कराया जाए. §ֆ:§֍:8 साल में बढ़े 55 रुपये§ֆ:यूपी में गन्ने के मूल्य आठ साल पहले बढ़े थे. इन वर्षों में यूपी में गन्ने का एसएपी मात्र 55 रुपये बढ़ा. 2017-18 में गन्ने के एसएपी में 10 रुपये की बढ़ोतरी कर 325 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय किया गया था जो अगले तीन साल फ्रीज रहा. लेकिन पेराई सीजन 2022-23 में जनवरी तक एसएपी का ऐलान नहीं हुआ और आखिर में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यूपी सरकार ने 2023-24 सीजन के लिए गन्ने का एसएपी 20 रुपये बढ़ाकर 370 रुपये तय किया था. इस तरह पिछले सात साल में यूपी में गन्ने का एसएपी तीन बार 10, 25 और 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा है. इसका मूल यही निकल कर आता है कि केवल चुनाव के दौरान ही गन्ने की एसएपी बढ़ी है.§भारत में सबसे ज्यादा गन्ने का उत्पादन उत्तर प्रदेश में किया जाता है. राज्य में आधिकारिक तौर पर एक अक्टूबर से गन्ना पेराई सत्र (2024-25) की शुरुआत हो चुकी है, मगर गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य घोषित नहीं किया है. इसके चलते किसान नाराज दिख रहे हैं. अब किसान बिना भाव जाने ही गन्ना बेचने पर मजबूर हैं. केंद्र सरकार ने फरवरी में ही 2024-25 शुगर सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी 25 रुपये बढ़ाकर 340 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया था. वही, यूपी सरकार की ओर से गन्ने कोई राज्य परामर्श मूल्य पेराई सत्र शुरू होने के एक महीना बाद भी घोषित नहीं हुआ है.

