केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राजधानी में “भविष्य की क्षमताएं: भारत की कार्यबल संरचना में परिवर्तन” शीर्षक रिपोर्ट का विमोचन किया। यह रिपोर्ट प्रतिस्पर्धात्मकता संस्थान (Institute for Competitiveness) द्वारा तैयार की गई है और यह भारत के कौशल परिदृश्य पर आधारित एक स्वतंत्र विश्लेषण है।
कौशल को पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता
रिपोर्ट के विमोचन अवसर पर जयंत चौधरी ने कहा,
“कौशल विकास को केवल आपूर्ति आधारित पहल के रूप में नहीं, बल्कि एक मांग-संचालित, बाजारोन्मुख और परिणाम-केंद्रित प्रणाली के रूप में देखा जाना चाहिए, जो उद्योग और कार्यबल की बदलती जरूरतों को पूरा करे।”
उन्होंने यह भी कहा कि औपचारिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ-साथ अनुभवजन्य और अनौपचारिक ज्ञान को भी मान्यता देना चाहिए।
रोजगार क्षमता सूचकांक का सुझाव
केंद्रीय मंत्री ने यह प्रस्ताव भी रखा कि एक रोजगार क्षमता सूचकांक (Employability Index) विकसित किया जाना चाहिए, जिससे यह मूल्यांकन किया जा सके कि युवाओं को दी जा रही शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण उनके रोजगार अवसरों को कैसे प्रभावित कर रही है।
सचिव की टिप्पणी: शोध और संरचना दोनों पर ज़ोर
मंत्रालय के सचिव अतुल कुमार तिवारी ने कहा कि कौशल विकास केवल नीतिगत मुद्दा नहीं बल्कि एक शोध का क्षेत्र भी है। उन्होंने डेटा-संचालित निर्णयों और संरचनात्मक सुधारों के लिए ठोस साहित्य और साक्ष्य आधारित विश्लेषण की आवश्यकता पर बल दिया।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
रिपोर्ट में PLFS (2023-24) के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि:
- भारत के 88% श्रमिक निम्न-कौशल कार्यों में लगे हैं,
- जबकि केवल 10-12% श्रमिक उच्च-कौशल कार्यों में संलग्न हैं।
भारत में कौशल प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र:
- सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटीईएस
- वस्त्र एवं परिधान
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान
- सौंदर्य और वेलनेस
रिपोर्ट में इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण, प्रमाणन और उद्योग से जुड़ाव की स्थिति का मूल्यांकन PLFS, PMKVY 4.0, सेक्टर स्किल काउंसिल (SSC), और NAPS जैसे स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से किया गया है।
नीतिगत और संरचनात्मक बदलाव की ज़रूरत
रिपोर्ट में निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:
- कौशल मांग की सटीक भविष्यवाणी के लिए मानकीकृत डेटा संग्रह प्रणाली बनाई जाए।
- उद्योगों को प्रमाणित कुशल युवाओं को नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए।
- प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच सीधा समन्वय और ज़िम्मेदारी सुनिश्चित की जाए।
- कुशल श्रमिकों को उच्च वेतन देकर उनकी प्रतिभा को मान्यता दी जाए।
यह रिपोर्ट भारत में कौशल विकास और शिक्षा-रोजगार की कड़ी को मज़बूत करने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। जयंत चौधरी ने कहा कि ऐसी रिपोर्टें नीति-निर्माण को बेहतर बनाने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने प्रतिस्पर्धात्मकता संस्थान की टीम को इस प्रयास के लिए बधाई दी और कौशल क्षेत्र में आगे भी सहयोग का आश्वासन दिया।

