सोयाबीन प्रसंस्करण संघ (SOPA) और एचआईएल (भारत) लिमिटेड द्वारा इंदौर में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 70 से अधिक किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और किसानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सोयाबीन के खाद्य उपयोग और कीटनाशकों के सुरक्षित प्रयोग के प्रति किसानों को जागरूक करना था।
कार्यक्रम में शामिल हुए प्रमुख व्यक्ति
इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मनींदर कौर द्विवेदी, कृषि मंत्रालय के नीरज कुमार, SOPA के कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक, खाद्य पोषण विशेषज्ञ डॉ. सुरेश इतापु, उप निदेशक कृषि सी.एल. केवड़ा और एचआईएल के एजीएम राजेन्द्र थापर जैसे वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।
सोयाबीन का पोषण और आर्थिक महत्व
डॉ. सुरेश इतापु ने बताया कि भारत में प्रोटीन की कमी को दूर करने में सोयाबीन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने किसानों को सोयाबीन से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर अपनी आय बढ़ाने के तरीके भी बताए। इससे न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी पौष्टिक आहार मिलेगा।
कीटनाशकों का सुरक्षित उपयोग
एचआईएल के राजेन्द्र थापर ने किसानों को कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही मात्रा और समय पर कीटनाशकों का प्रयोग करने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि कीटनाशक अवशेषों की समस्या भी कम होगी, जिससे निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे।
समेकित कीट प्रबंधन (IPM) पर जोर
कार्यक्रम में किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (IPM) तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है और किसानों की लागत को कम करते हुए टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देती है।
महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यक्रम की खास बात महिला किसानों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही, जो दर्शाता है कि महिलाएं अब कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपना रही हैं।
सरकार का समर्थन और सुरक्षा किट वितरण
मनींदर कौर द्विवेदी ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और सोयाबीन के खाद्य उपयोग को बढ़ावा देने से किसानों तथा उपभोक्ताओं दोनों को लाभ होगा। एचआईएल द्वारा किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के लिए सुरक्षा किट भी वितरित की गईं।
निष्कर्ष
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हुआ। ऐसे आयोजन भविष्य में भी होने चाहिए ताकि किसान आधुनिक तकनीकों से लैस होकर अपनी आय बढ़ा सकें और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकें।

