֍:5 दिन चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम §ֆ:डॉ. सिंह ने कृषि सखियों का स्वागत करते हुए प्राकृतिक खेती के महत्व और इसके आवश्यक घटकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 मई से 24 मई तक चलेगा, जिसमें जिले के 21 क्लस्टर की 42 कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा।§֍:प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों पर दिया गया प्रशिक्षण§ֆ:प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर डॉ. प्रशांत देव सिंह, कैलाश राम और श्रीराम कृष्ण ने कृषि सखियों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, अग्नास्त्र जैसे प्राकृतिक खेती के मूलभूत तत्वों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।§֍:कृषि सखियों को मिल रहा व्यवहारिक ज्ञान§ֆ:प्रशिक्षकों ने बताया कि ये तकनीकें न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि किसानों की लागत को भी कम करती हैं और भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं। प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से भी सखियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।§֍:प्रशिक्षण से मिलेगा किसानों को सीधा लाभ§ֆ:इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि सखियों को इतना दक्ष बनाना है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर सकें और उन्हें इसके वैज्ञानिक तरीकों से अवगत करा सकें। प्रशिक्षण के उपरांत ये कृषि सखियां अपने क्षेत्र के किसानों को जागरूक कर एक हरित और टिकाऊ कृषि प्रणाली की ओर अग्रसर करेंगी।§कृषि विज्ञान केन्द्र, पिलखी में “नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग” योजना के अंतर्गत चयनित कृषि सखी/सीआरपी के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिंह ने किया।

