֍:बनाना होगा मॉडल सिस्टम§ֆ:गडवासु में आयोजित वर्कशॉप को यूनिवर्सिटी और समन्वय जूनोटिक रोग प्रभाग, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया था. इस मौके पर डॉ. जसबीर सिंह बेदी, निदेशक, सेंटर फॉर वन हेल्थ, वेट वर्सिटी ने विशेष अतिथि वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि सामुदायिक सहभागिता पहलों के माध्यम से ब्रूसेलोसिस, रेबीज, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) और खाद्य सुरक्षा जैसे जूनोटिक रोगों की रोकथाम में गडवासु अहम रोल अदा कर रहा है. उन्होंने कहा कि जूनोटिक रोग नियंत्रण के लिए एकीकृत रणनीति विकसित करने के लिए वेट वर्सिटी और एम्स बठिंडा के बीच सहयोग इस योजना में अहम भूमिका निभाएगा. जूनोसिस पर एक मॉडल निगरानी ढांचा बहुत जरूरी है. जिससे कि पंजाब के चिकित्सा और पशु स्वास्थ्य विभाग के बीच वास्तविक समय में डेटा साझा करना संभव हो सके.§֍:ऐसे होगी रोकथाम§ֆ:• रोकथाम-निगरानी सिस्टम मजबूत करने के लिए नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) मिशन चलाया जा रहा है.
• मिशन के तहत सात बड़े काम किए जा रहे हैं. हालांकि अभी इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जा रहा है.
• नेशनल और स्टेट लेवल पर महामारी की जांच को संयुक्त टीम बनेगी.
• महामारी फैलने पर संयुक्तं टीम रेस्पांस करेगी.
• सभी पशुओं के रोग की निगरानी का सिस्टम तैयार किया जाएगा.
• रेग्यूलेटरी सिस्टम को मजबूत बनाने पर काम होगा.
• महामारी फैलने से पहले चेतावनी देने के लिए सिस्टम बनाने पर काम होगा.
• नेशनल डिजास्टर मैंनेजमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर महामारी की गंभीरता को कम करना.
• रोगों के टीके और उसका इलाज विकसित करने के लिए तय अनुसंधान कर तैयार करना.
• रोग का पता लगाने के समय-संवेदनशीलता में सुधार किया जाएगा.
• जीनोमिक और पर्यावरण निगरानी फार्मूले तैयार करना जैसे काम होंगे.
§पशुओं में होने वाली जूनोटिक या जूनोसिस बीमारोयों की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारी स्तर पर लगातार कार्य किया जा रहा है. पशुओं से इंसानों में होने वाली बीमिरियों को ही जूनोटिक बीमारी कहा जाता है. ये बीमारी इंसानों क साथ पशुओं के लिए भी जानलेवा होती हैं. अगर सम पर सावधानी न बरती जाए तो पशुओं से ये इंसानों तक फैल सकती है. इसपर चर्चा करने के लिए पंजाब में स्थित लुधियाना की गुरु अंगद देव वेटनरी और एनीमल साइंस विश्विद्यालय में एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया था. इस दौरान डॉक्टर, पशु चिकित्सक, पशुपालन अधिकारी, शोधकर्ता, शिक्षाविद, कृषि वैज्ञानिक आदि को बुलाया गया था, जिससे जूनोटिक बीमारियों की रोकथाम को मजबूत करने के लिए सभी विभाग मिलकर साथ काम कर चुके हैं.

