֍:1. को. 0238 (CO 0238)
§ֆ:विशेषताएँ: यह किस्म अत्यधिक उत्पादक और रेड रॉट रोग प्रतिरोधी है।
पैदावार: 80-100 टन प्रति हेक्टेयर।
उपयुक्त क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार।
लाभ: इसमें चीनी की मात्रा (सुक्रोस) 18-20% तक होती है।
§֍:2. को. 15023 (CO 15023)
§ֆ:विशेषताएँ: यह नई विकसित उच्च उपज वाली किस्म है, जो सूखा सहनशील है।
पैदावार: 90-110 टन प्रति हेक्टेयर।
उपयुक्त क्षेत्र: महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु।
लाभ: यह किस्म पायरिल्ला और कीटों के प्रति सहनशील है।
§֍:3. को. 86032 (CO 86032)
§ֆ:विशेषताएँ: यह किस्म लंबे समय तक खड़ी रह सकती है और अधिक रस देती है।
पैदावार: 75-95 टन प्रति हेक्टेयर।
उपयुक्त क्षेत्र: गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान।
लाभ: यह किस्म व्हिप स्मट रोग के प्रति प्रतिरोधी है।
§֍:4. को. 419 (CO 419)
§ֆ:विशेषताएँ: यह पारंपरिक लेकिन विश्वसनीय किस्म है, जो जलभराव को सहन कर सकती है।
पैदावार: 70-85 टन प्रति हेक्टेयर।
उपयुक्त क्षेत्र: तटीय क्षेत्र जैसे आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु।
लाभ: इसकी चीनी गुणवत्ता उत्कृष्ट होती है।
§֍:5. को. 312 (CO 312)
§ֆ:विशेषताएँ: यह किस्म जल्दी पकने वाली (अगेती) है और कम समय में अधिक उत्पादन देती है।
पैदावार: 65-80 टन प्रति हेक्टेयर।
उपयुक्त क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड।
लाभ: यह किस्म ठंडे मौसम के लिए उपयुक्त है।
§֍:§֍:§֍:§ֆ:गन्ने की उन्नत किस्मों का चयन करके किसान न केवल अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि रोगों और प्रतिकूल मौसम से भी बचाव कर सकते हैं। को. 0238 और को. 15023 जैसी नई किस्में किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हैं। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल किस्म का ही चयन करें।
§गन्ना भारत की एक प्रमुख नकदी फसल है, जिससे चीनी, गुड़ और इथेनॉल जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। उन्नत किस्मों का चयन करके किसान अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं। यहां गन्ने की 5 सर्वश्रेष्ठ किस्मों की जानकारी दी जा रही है:

