֍:एचएस 507 (पूसा सकेती) §ֆ:ICAR-IARI के शिमला केंद्र ने एचएस 507 या पूसा सकेती को विकसित किया है. इसे खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है. यह किस्म सिंचित और वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए अनुकूल है और गर्मी के प्रभाव से बचाने में सक्षम है. यह किस्म 170-175 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकती है. उत्पादन की बात करें तो इसकी क्षमता 24-25 क्विंटल प्रति एकड़ है. यह पहाड़ी क्षेत्रों के निचले एवं मध्यवर्ती इलाकों में सिंचित और असिंचित भूमि पर समय पर बुवाई के लिए बेहतर मानी जाती है. इस किस्म में पीले और भूरे रतुए, पत्ता झुलसा और करनाल बंट रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता है. इसके दाने शरबती, अर्ध कठोर और मध्यम मोटाई के होते हैं और इसके पौधों की लंबाई लगभग 95 सेंटीमीटर होती है.§֍:एचएस 562 §ֆ:HS 562 एक अधिक उपज देने वाली किस्म है, जो कि प्रति एकड़ में 25 क्विंटल तक का उत्पादन देती है. यह किस्म हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में खेती के लिए अनुसंशित है और जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है. इसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा रीजनल सेंटर शिमला द्वारा विकसित किया गया है. बता दें कि इसके पौधे की लंबाई 99 से 101 सेंटीमीटर के बीच होती है. यह किस्म पीले और भूरे रतुए रोगों के प्रति प्रतिरोधी है.§֍:एचपी 349 §ֆ:हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने HP 349 किस्म को विकसित किया है. यह किस्म अपने आप में विशेष है और जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न तापमान के उतार-चढ़ाव के प्रति प्रतिरोधक है. इस किस्म की प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता लगभग 25 क्विंटल है. इसकी बालियां अच्छे से भरे हुए अनाज से भारी होती हैं और पौधों की लंबाई 86 से 102 सेंटीमीटर तक होती है.§भारत में कृषि विभाग किसानों को लेकर काफी सक्रीय है और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कई नई किस्मों का इजात करता है. इसका उद्देश्य कृषकों को बढ़िया गुणवत्तापूर्ण फसल दिलाना है.

