भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुआ ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) अब 1 अक्टूबर, 2025 से लागू होगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को मुंबई में एक एसोचैम कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी।
इस समझौते को EFTA के चारों सदस्य देशों — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन — ने औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है, जिसमें स्विट्जरलैंड आखिरी देश रहा जिसने हाल ही में अपनी संसद से इस पर मुहर लगवाई। भारत में इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय समझौतों को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
समझौते की खास बातें:
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$100 अरब डॉलर का निवेश: EFTA ने भारत को अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का सीधा विदेशी निवेश (FDI) देने का वादा किया है।
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1 मिलियन यानी 10 लाख नौकरियों का सृजन: यह निवेश भारत में प्रत्यक्ष रूप से 10 लाख नौकरियों के अवसर पैदा करेगा।
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निर्यात को मिलेगा बढ़ावा: EFTA भारत के 99.6% निर्यातों को शून्य या कम शुल्क पर स्वीकार करेगा।
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गैर-कृषि उत्पादों पर पूरा बाजार खुलेगा, जबकि संसाधित कृषि उत्पादों पर भी रियायतें दी जाएंगी।
भारत की ओर से रियायतें और सुरक्षा:
भारत ने EFTA को 82.7% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देने पर सहमति जताई है, जो EFTA के 95.3% निर्यात को कवर करता है। इसमें 80% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ सोने के आयात का है। हालांकि, भारत ने सोने पर मौजूदा प्रभावी शुल्क को बरकरार रखा है।
डेयरी, सोया, कोयला और संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है ताकि देश के किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा हो सके।
भारत-ईएफटीए व्यापार संतुलन:
वर्तमान में भारत का EFTA के साथ व्यापार घाटा अत्यधिक है।
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2024-25 में भारत का निर्यात: $1.96 अरब
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भारत का आयात: $22.4 अरब
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केवल स्विट्जरलैंड से सोने का आयात: $18.1 अरब (पिछले वित्त वर्ष)
बिजनेस डेलीगेशन की सक्रियता:
इस वर्ष फरवरी में EFTA देशों से एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था, जिसने निवेश के विभिन्न क्षेत्रों का मूल्यांकन किया। जवाब में भारत ने जून में स्विट्जरलैंड का दौरा किया और विभिन्न व्यापारिक साझेदारियों को लेकर बातचीत की।

