֍:कितनी मिलेगी सब्सिडी?§ֆ:खेत में सोलर पंप लगाने के लिए किसान को 10-30 प्रतिशत दाम चुकाना होगा. अदाहरण के तौर पर अगर पंप का दाम 10 हजार रुपये है तो आपको 3000 रुपये ही देने होंगे. बाकी का खर्च सरकार के खाते से होगा. ऐसे में किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है. किसान कम पैसों में इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. §֍:जानें क्या है योजना?§ֆ:सिंचाई के लिए जारी हुई पीएम कुसुम योजना के तहत सरकार उन इलाकों में सोलर पंप लगाने की तैयारी कर रही है, जहां बिजली नहीं और जहां किसान डीजन पंप से खेतों की सिंचाई करते हैं या दूसरे तरीकों से खेतों की सिंचाई करते हैं. जिन इलाकों में सोलर पंप लगेंगे, वहां किसानों का बिजली काट दिया जाएगा. साथ ही ट्यूबवेल में सोलर पंप लगाने के बाद उन्हें भविष्य में बिजली कनेक्शन नहीं दिया जाएगा. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कराना अनिवार्य है. साथ ही वेबसाइट पर सोलर पंप बुकिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किए जा सकेंगे. किसान योजना के तहत आवेदन करने वाला व्यक्ति किसान होना चाहिए. यह योजना सभी प्रकार के किसानों के लिए खुली है, चाहे वे छोटे, मध्यम या बड़े किसान हों.§֍:जमीन की स्थिति§ֆ:• योजना के तहत उन किसानों को प्राथमिकता दी जाती है जिनके पास बंजर या अनुपयोगी भूमि है.
• अगर किसान सोलर पंप या सोलर पावर प्लांट लगाना चाहता है तो खेती योग्य भूमि पर भी इस योजना का लाभ उठाया जा सकता है.
§֍:सोलर पंप के लिए पात्रता और शर्तें§ֆ:• जो किसान डीजल पंप का उपयोग कर रहे हैं और इसे सोलर पंप में बदलना चाहते हैं, वे इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं.
• जो किसान पहले से ही इलेक्ट्रिक पंप का उपयोग कर रहे हैं, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.
• राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों में लागू अन्य नियम और शर्तें निर्धारित कर सकती हैं.
• योजना के तहत आवेदन करने के लिए किसानों को कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे.
§किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता होती है. ऐसे में किसानों को काफी ज्यादा पैसे चुकाकर बोरिंग या इंजन पंप लगवाने पड़ते हैं. ऐसे में किसानों की लागत काफी ज्यादा प्रभावित होती है. ऐसे में किसानों का खर्च कम करने के लिए सरकार ने एक योजना जारी की है, जिसमें किसान सोलर पंप लगवाकर आसानी से कम लागत के साथ सालों तक सिंचाई कर सकते हैं. इसमें सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जा रही है.

