֍:§ֆ:पंजाब में इस साल केवल 9,655 “पराली जलाने की घटनाएं” दर्ज की गईं, जबकि पिछले साल 15 सितंबर से 18 नवंबर के बीच इसी अवधि के दौरान 33,719 घटनाएं हुई थीं. 2022 में पराली जलाने के आंकड़ों की तुलना में यह कमी 80 प्रतिशत से अधिक है, जब कुल 44,489 पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं.§֍:जवाब में कही गई ये बात§ֆ:राज्य मंत्री के जवाब में कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के परामर्श से विकसित एक मानक प्रोटोकॉल के हिस्से के रूप में डेटा जुटाया गया है. पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी खेतों में आग लगने की घटनाओं की संख्या 2022 में 3,088 से घटकर इस साल 1,118 रह गई है. 2023 में ये 2,052 थी. वहीं, उत्तर प्रदेश में यह संख्या 2022 में 72 से बढ़कर इस साल 192 हो गई है, जो करीब 66 फीसदी है.§ֆ:दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और डेमोलिशन से निकलने वाली धूल, सड़क और खुले क्षेत्रों की धूल, बायोमास जलाना, नगरपालिका के ठोस कचरे को जलाना, लैंडफिल में आग से होने वाले वायु प्रदूषण आदि का मिलाजुला रिजल्ट है. §ֆ:“मॉनसून के बाद और सर्दियों के महीनों के दौरान कम तापमान, प्रदूषण के तत्वों का ऊंचाई पर नहीं जाना और स्थिर हवाओं के कारण स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है. पराली जलाने और पटाखों जैसी घटनाओं से निकलने वाले धुएं के कारण यह और बढ़ जाता है. पंजाब, हरियाणा, यूपी के एनसीआर जिलों और अन्य क्षेत्रों के उत्तरी राज्यों में धान की पराली जलाने की घटनाएं एनसीआर में वायु की क्वालिटी को प्रभावित करती हैं, खासकर अक्टूबर और नवंबर के बीच की अवधि में,” जवाब में कहा गया है.§पंजाब में पराली जलाने को लेकर काफी दिनों से सरकार से जवाब मांगे जा रहे थे. नई दिल्ली में भी एयर क्वालिटी प्रभावित होने की जिम्मेदारी भी पंजाब में पराली जलने को दी गई. वहीं, इस बार पिछले साल की तुलना में इस साल राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 71.37 प्रतिशत की कमी आई है. यह आंकड़े पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सोमवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सांसद गद्दीगौदर पर्वतगौड़ा चंदनगौड़ा (कर्नाटक) और डॉ. किरसन नामदेव (महाराष्ट्र) के एक प्रश्न के उत्तर में दिए.

