֍:पहला दिन – धनतेरस §ֆ:कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन ही धन्वन्तरी भगवान अमृत मंथन के समय अमृत कुंभ के साथ अवतार लिया था. विष्णु भगवान के 24 अवतारों में से एक धन्वन्तरी भगवान हैं. धनतेरस के दिन धन्वन्तरी भगवान की पूजा का विधान है. इस दिन धन्वन्तरी भगवान का पूजन करने से व्यक्ति को लंबी आयु और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है. प्राचीन काल से ही धन्वन्तरी भगवान की जयंती को धूमधाम से मनाया जाता रहा है. §֍:
दूसरा दिन – नरक चतुर्दशी
§ֆ:
दीवाली के पंच दिवसीय त्योहारों में दूसरा नाम नरक चतुर्दशी का है. देशभर में इसे धनतेरस के अगले दिन मनाया जाता है. कहीं-कही दीपावली नरक चतुर्दशी के दिन मनाई जाती है. वहीं, देश के उत्तरी राज्यों में इसे छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता है. इस दिन ही नरक निवार्णार्थ चतुर्वर्ती वाले दीपक को सूर्यास्त के समय घर के मुख्य द्वारा पर जलाते हैं.
§֍:तीसरा दिन – दीपावली §ֆ:इस दिन शुभ लग्न के दौरान भगवान गणेश और देवी महालक्ष्मी का मुख्य पूजन किया जाता है. इस दिन मसिपात्र यानी दवात और बही-खाता, तिजोरी आदि स्थानों के पूजन का विधान है. पूजा के बाद पटाखे जलाए जाते हैं और मिठाई बांटी जाती है. इस दिन रात्रि जागरण करते समय अपने इष्टदेव अभीष्टदेव और लक्ष्मी माता के मंत्रों की स्थापना भी करनी चाहिए.§֍:चौथा दिन – गोवर्धन पूजा §ֆ:कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को अन्नकूट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना कर अन्नकूट का उत्सव मनाया जाता है. आज के दिन गांव से लेकर शहरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर पूजन का विधान है. आज के दिन ही मंदिरों में कई प्रकार के पकवान, मिष्ठान, शाक, मेवा तथा फलों से छप्पन भोग लगाया जाता है. §֍:
पांचवा दिन – भैया दूज
§ֆ:पंच दिवसीय त्योहारों का समापन भैयादूज के साथ होता है. इस दिन यमुना नदी में स्नान करना काफी शुभ माना गया है. वहीं, भाई का बहन के घर भोजन करना शुभ होता है. शास्त्रों के अनुसार यमराज भी इस पूजन को करता है. इसी दिन चित्रवंशीय, कुलोद्भव वंश के आने वाले लोग चित्रगुप्त का पूजन करते हैं.§भारत में दिवाली का एक अलग महत्व है. इसे पूरे देश में हर जाति-धर्म के लोग मनाते हैं. दीवाली के त्योहार को पंच-दिवसीय दीपोत्सव पर्व के नाम से भी जाना जाता है. इस पंच दिवसीय त्योहार का शुभारंभ धनतेरस से होता है और इसका समापन भैयादूज पर होता है. इस दौरान पांच दिनों में क्या खास होने वाला है जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर…

