ֆ:इस अभियान के अंतर्गत उचकागांव के श्यामपुर और नरकटिया, कुचायकोट के बंगरा और बनिया छापर, तथा थावे के वृंदावन और ऐकडेरवां गांवों में चौपालें आयोजित की गईं। इन चौपालों में किसानों को वैज्ञानिकों द्वारा जलवायु परिवर्तन के अनुरूप फसल चयन, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की विधियां, जल संरक्षण, जैविक खाद का उपयोग और कीट प्रबंधन के आधुनिक तरीके सिखाए गए।§ֆ:कार्यक्रम की अगुआई केंद्रीय कृषि विज्ञान केंद्र, सिपाया की प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुपमा कुमारी ने की। उनके साथ सहायक निदेशक कृषि प्रियंका कुमारी, उप परियोजना निदेशक रूणु कुमारी, कृषि वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार, डॉ. अभिषेक राणा और प्रियंका कुमारी सहित अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।चौपालों में न केवल तकनीकी ज्ञान साझा किया गया, बल्कि किसानों से संवाद कर उनके अनुभव और समस्याओं को भी समझा गया, ताकि स्थानीय स्तर पर अनुकूल समाधान तैयार किए जा सकें।§ֆ:इस पहल से स्पष्ट है कि अब चौपालें सिर्फ बातचीत का मंच नहीं, बल्कि ग्राम्य कृषि नवाचार की प्रयोगशालाएं बनती जा रही हैं, जहां परंपरा और तकनीक का समावेश हो रहा है।§बिहार के गोपालगंज जिले में किसानों को आत्मनिर्भर और वैज्ञानिक सोच से लैस बनाने के उद्देश्य से ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ तेज़ी से गांव-गांव फैल रहा है। बुधवार को इस अभियान के तहत कुचायकोट, थावे और उचकागांव प्रखंड के कुल छह गांवों में किसान चौपालों का आयोजन किया गया, जिसमें 800 से अधिक किसानों ने भाग लेकर खेती की नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की।

