֍:छोड़ी सरकारी नौकरी, वीआरएस लिया§ֆ:सुनीता केजरीवाल ने पार्टी के कैम्पेन में हिस्सा लेने के लिए आईआरएस की नौकरी छोड़ दी थी. उन्होंने 2016 में वीआरएस (Voluntary Retirement Scheme) ले लिया था, क्योंकि सरकारी कर्मचारी के तौर पर वह किसी पार्टी का सर्मथन नहीं कर सकती थीं और ना ही सरकारी के विरोध में कोई प्रदर्शन कर सकती थीं. आम आदमी पार्टी के हित में वोट मांगने के लिए सुनीता केजरीवाल ने आईआरएस की पद छोड़ने का फैसला लिया था.
जब वह आईआरएस पद पर थीं तब उन्हें सरकार की तरफ से सिक्योरिटी, बंगला, सैलरी और कई तरह के लाभ दिए जाते थे. वीआरएस लेने के बाद सरकार उन्हें कुछ ही सुविधाएं देती है. आइए जानते हैं कि आईआरएस का पद छोड़ने के बाद सुनीता केजरीवाल को सरकार की तरफ से कौन-सी सुविधाएं मिलती हैं और सुनीता केजरीवाल पर लागू हुआ वीआरएस का रूल क्या कहता है.
§֍:क्या होता है वीआरएस?§ֆ:सरकारी पद पर 30 या 20 साल नौकरी करने के बाद कर्मचारी प्री-मेच्योर रिटायरमेंट ले सकते हैं. Appendix 10 of CCS (Pension) रूल के चैप्टर छह के मुताबिक, ऐसे कर्मचारी को पेंशन रूल 44 के तहत दी जाती है. कर्मचारी को पीएफ, ग्रेच्युटी और कंपनी की पॉलिसी के मुताबिक वेतन मिलता है. वीआरएस के बाद 5 लाख रुपए तक की रकम टैक्स मुक्त है.
वीआरएस के बाद कर्मचारी ऑफ ड्यूटी हो जाता है इसी कारण वह रेलवे, एयरप्लेन, बस आदि में मुफ्त में या टिकट पर छूट पाकर सफर नहीं कर सकता है. इसके अलावा वीआरएस के बाद सर्विस में रहते हुए भत्ता (Allowance) नहीं दिया जाता है.
§अंरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब घोटाला केस में जेल में बंद हैं. कोर्ट द्वारा बढ़ती रिमांड को देखते हुए फिलहाल दिल्ली के मुख्यमंत्री का जेल से बाहर आना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि फिर पार्टी कौन संभालेगा? इस बीच केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल का नाम काफी हाईलाइट हो रहा है. माना जा रहा है वह अब पार्टी का काम संभाल सकती हैं. सुनीता केजरीवाल खुद एक आईआरएस अफसर रह चुकी हैं और पति का साथ देने के लिए उन्होंने इस पद का त्याग भी कर दिया था.

