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काशी और उसकी आत्मा गंगा को पॉलीथिन मुक्त करने को लेकर कपड़े के झोले का वितरण किया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि पर्यावरणीय साक्षरता की इस मुहिम से जुड़ना और अन्य लोगों को अपने साथ जोड़ते जाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
पॉलीथिन को पूरी तरह से छोटे टुकड़े में तब्दील होने में सैकड़ों वर्ष का समय लगता है। प्लास्टिक बैग्स बहुत से जहरीले केमिकल्स से मिलकर बनते हैं। इसमें जायलेन, इथिलेन ऑक्साइड और बेंजेंन जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। इन केमिकल्स से बहुत सी बीमारियां और विभिन्न प्रकार के डिसाडर्स हो जाते हैं। प्लास्टिक के केमिकल पर्यावरण के लिए भी बेहद हानिकारक होते हैं जिससे इंसान, जानवरों, पौधों और सभी जीवित चीजों को नुकसान पहुंचता है। पॉलीथिन को जलाने और फेंकने पर जहरीले केमिकल्स का उत्सर्जन होता है। जिनसे स्वास्थ्य और पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचती है।
आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला, महर्षि योगी विद्याश्रम के वेद पाठी बटुक, आचार्य राकेश मिश्रा, प्रभारी सीमंत केसरी स्वाइं, सुनील श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
§गंगा स्वच्छता और पॉलीथिन के खिलाफ चलाए जा रहे जन जागरूकता अभियान के तहत गुरुवार को नमामि गंगे ने वेद पाठी बटुकों के साथ लोगों को सजग किया। नमामि गंगे के सदस्यों ने महर्षि योगी विद्याश्रम सिद्धेश्वरी के बटुकों के साथ पॉलिथीन से होने वाले नुकसान के साथ ही गंदगी को रोकने की अपील की। कहा की पॉलीथिन के इस्तेमाल को बंद करके हम काशी को और गंगा को स्वच्छ बना सकते हैं ।

