वर्तमान समय में जहाँ कुछ युवा खेती से दूरी बना रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो कृषि को एक व्यवसाय के रूप में अपनाकर सफल उद्यमी बन रहे हैं। आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक युवा किसान रवि ढाका की, जिन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के बजाय कृषि क्षेत्र को अपना करियर बनाया।
बागपत जिले की बड़ौत तहसील के अंतर्गत ढिकौली गांव के निवासी रवि ढाका बचपन से ही मेहनती रहे हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ नया करने की ठानी और इसी दौरान वे डॉ. जे.के. श्योराण के संपर्क में आए। यहीं से उन्हें कृषि क्षेत्र का सही मार्गदर्शन मिलना शुरू हुआ। डॉ. श्योराण के मार्गदर्शन में रवि ने मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण लेने के बाद रवि ने अन्य किसानों से भी इस व्यवसाय के बारे में जानकारी ली और उनका रुझान मधुमक्खी पालन की ओर बढ़ने लगा। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र से उन्हें काफी सहयोग मिला।
रवि ने प्रारंभिक चरण में 50 बॉक्स से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी, जो अब बढ़कर 100 से अधिक बॉक्स हो चुके हैं। रवि कहते हैं, “हम शुरू से ही खेती से जुड़े रहे हैं। अब केवल गन्ने की खेती के भरोसे नहीं रहा जा सकता। किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर भी अनेक कार्य कर सकते हैं।” इसी सोच के साथ रवि ने मधुमक्खी पालन को अपनाया।
रवि ने न सिर्फ स्वयं इस व्यवसाय को आगे बढ़ाया, बल्कि अपने अन्य साथियों को भी मधुमक्खी पालन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद की। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में उनके बॉक्स की संख्या और भी अधिक बढ़ेगी।
शुरुआती समय में रवि को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने ₹50,000 की पूंजी लगाकर इस व्यवसाय की शुरुआत की थी। उनका मानना है कि किसान कम पूंजी में भी मधुमक्खी पालन जैसे लाभकारी व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं।
मधुमक्खी पालन की तकनीकी जानकारी साझा करते हुए रवि कहते हैं कि इसके लिए सबसे पहले प्रशिक्षण लेना आवश्यक है। फिर उचित नस्ल का चयन करना होता है। आमतौर पर एपिस मेलीफेरा (Apis mellifera) नस्ल की मधुमक्खी से पालन किया जाता है, जिससे अच्छा उत्पादन मिलता है।
रवि यह भी बताते हैं कि मधुमक्खी पालन के लिए ऐसे स्थान का चयन नहीं करना चाहिए जहाँ फसलों में कीटनाशकों का अधिक उपयोग होता हो, क्योंकि इससे मधुमक्खियाँ मर जाती हैं और पालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
आज रवि ढाका एक सफल युवा कृषि उद्यमी के रूप में जाने जाते हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। वे अपने अनुभव साझा कर किसानों को इस व्यवसाय से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

