֍:इस योजना को जारी रखने की सलाह§ֆ:संसदीय समिति ने सुझाव में अध्यक्ष लोकसभा सांसद और पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने सरकार को सलाह दी कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के दूसरे फेज को जारी करना चाहिए और इसे वित्त वर्ष 2026 से 2030 तक चलाया जाना चाहिए. इसी के चलते कमेटी ने अपनी सलाह में कहा है कि मत्स्य संपदा योजना फेज-2 को मकसद देश में मछली पालन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने पर होना चाहिए ताकि सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिल सके और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप के मैदानी इलाकों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.§֍:नहीं हो रहा फंड का पूर्ण उपयोग§ֆ:स्टैंडिंग कमेटी ने आलोचना करते हुए कहा कि फंड का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. कमेटी ने कहा कि वित्त मंत्रालय की ओर से इसके लिए तीन साल पहले ही नया वित्त विभाग बनाया है, उसके बाद भी फंड का सही-सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. इसी के साथ सुझाव में कहा है कि मत्स्य विभाग को राज्य सरकारों और वहां के विभागों से मिलकर इस दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए. सुझाव में कहा गया है कि मत्स्य विभाग का यही प्रयास मछुआरों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाने में मदद कर सकता है.§संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा है. इस दौरान संसद में कृषि, पशुपालन और फूड प्रोसेसिंग की स्टैंडिंग कमेटी ने सरकार को सुझाव दिया है. इसमें बताया गया कि देस के सभी मछुआरों का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है, इससे उन्हें सरकारी स्कीमों और नीतियों का लाभ मिल सकेगा. रजिस्ट्रेशन कराने से मछुआरों के साथ सराकर को भी नई नीतियां और स्कीम बनाने में मदद मिलेगी. स्टैंडिंग कमेटी ने संसद में अपनी तीसरी रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि देश में लगभग 2.8 करोड़ लोग फिशरीज से जुड़े हैं जिनमें मछुआरे, मछली पालक किसान और अन्य लोग भी हैं. लेकिन उनमें से 8.6-8.56 लाख व्यक्ति और 3393 संगठन ही नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) पर रजिस्टर्ड हैं.

