ֆ:सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक बताया कि पिछले खरीफ सीजन के दौरान देश में प्रति हेक्टेयर सोयाबीन की औसत उत्पादकता 1,002 किलोग्राम थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 1,063 किलोग्राम हो गई है।
उन्होंने कहा, “इस बार देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की बारिश का वितरण अच्छा रहा, जिससे फसल की पैदावार में बढ़ोतरी हुई। किसानों द्वारा खेती के उन्नत तरीकों को अपनाने से फसल की पैदावार में बढ़ोतरी हुई।”
पाठक ने बताया कि 2023 के खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई के बाद अगस्त में प्रमुख सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में तीन सप्ताह तक बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की भारी कमी हो गई, जिसके परिणामस्वरूप फसल उत्पादकता में गिरावट आई।
सोपा के अनुमान के अनुसार, इस बार देश में खरीफ सीजन के दौरान 118.32 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई और इसकी पैदावार 125.82 लाख टन रही।
एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 2023 के खरीफ सीजन के दौरान देश में कुल 118.55 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई और इस तिलहन फसल की पैदावार करीब 118.74 लाख टन रही।
सोपा के अनुसार, देश में सोयाबीन के सबसे बड़े उत्पादक मध्य प्रदेश में इस बार करीब 52 लाख हेक्टेयर में फसल की बुवाई हुई और इसका उत्पादन 55.40 लाख टन के स्तर पर रहा।
संगठन के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में महाराष्ट्र में 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 50.17 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि राजस्थान में 11.13 लाख हेक्टेयर में फसल बोई गई और इसकी उपज करीब 10.53 लाख टन रही।
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का करीब 60 फीसदी आयात करता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में सोयाबीन जैसी प्रमुख तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है।
केंद्र सरकार ने विपणन सीजन 2024-25 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पिछले सीजन के 4,600 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 4,892 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है।
§फसल प्रसंस्करणकर्ताओं के एक संगठन ने कहा कि अनुकूल मौसम की वजह से चालू खरीफ सीजन में देश में सोयाबीन का उत्पादन करीब 6 फीसदी बढ़कर करीब 126 लाख टन हो गया है। व्यापार संगठन ने कहा कि इसका रकबा पिछले सीजन के बराबर ही रहा।

