ֆ:एक किसान के लिए खेती की मिटटी की जांच कितनी ज़रूरी है ?
§ֆ:हमारी जो मिटटी है लगातार उसका स्वस्थ्य गिरता जा रहा है। इसी के साथ मनुष्य और पशुओं का भी स्वस्थ्य गिरता जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस क्षेत्र में धान, गन्ना, गेहूं की खेती की जाती है । इन फसलों में खाद का दोहन ज्यादा होता है। जिसके कारण मृदा के स्वस्थ्य पर असर पड रहा है। एक बात ये भी है कि इस क्षेत्र के किसान मृदा परिक्षण नही कराते हैं। यहाँ के किसान असीमित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, आवश्यकता से अधिक मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं इससे मृदा का स्वास्थ्य ख़राब हो रहा है। इसलिए खेती की मिटटी का परिक्षण कराना बहुत ही आवश्यक है।
§ֆ:खेती की मिटटी में मुख्य समस्या क्या होती है ?
§ֆ:उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से कृषि भूमि पर कई तरह के प्रभाव पड़ रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा मिटटी की उर्वरा शक्ति पर प्रभाव पड रहा है। मिटटी में कार्बनिक जीवाश्म लगातार कम होते जा रहे हैं। यदि हम बात करें कार्बनिक जीवाश्म वैल्यू मिटटी में 10.8 से एक है तो यह बहुत बढ़िया है। मिटटी में जीवाश्म वैल्यू लगातार कम होने के मुख्य कारण किसान सह फसली खेती नही करते है और न ही खेत की ज़मीन को एक दिन के लिए भी खली छोड़ते हैं।इससे धरती का दोहन अत्यधिक हो रहा है। इसलिए मिटटी में कई तरीके की समस्याएं में पैदा होती है। इसलिए किसानों को चाहिए की वो मिटटी की जांच अवश्य कराएँ।
§ֆ:मृदा संरक्षण की क्या क्या क्रियाएँ है जिससे इसको सही किया जा सके ?
§ֆ:लगातार खेती की जोत कम होती जा रही है, किसानों के पास सिमित साधन है, किसानों ने सहफसली खेती करना शुरू कर दिया है । उन्होंने गन्ने के साथ ढैंचा , मूंग, सरसों आदि की खेती करना शुरू कर दिया है। इसकी खेती करने से जो पतझड़ है, या फिर उसके अवशेष है। वो धीरे धीरे हमारी मिटटी में जायेंगे, जिससे मिटटी के कार्बनिक जीवांश बढ़ेंगे। इसके साथ ही किसानों को मिटटी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इसी के साथ किसी भी फसल की नई पत्ती पिली पड़ रही हैं तो किसानों को सल्फर का उपयोग करना चाहिए और यदि नई पत्ती पिली पड़ रही हैं तो किसानों को नाईट्रोजन का उपयोग करना चाहिए। इसी के साथ किसानों को पोटाश का उपयोग करना चाहिए। यह सब किसानों को मिटटी जांच के आधार पर ही उपयोग करना चाहिए।
§ֆ:क्या नैनों यूरिया असंतुलित उर्वरको के उपयोग का कोई समाधान है ?
§ֆ:हमने अपने कृषि विज्ञान केंद्र पर कुछ किसानों के यहाँ परिक्षण कराया था,जिसका रिजल्ट बहुत अच्छा रहा था। जो दानेदार यूरिया है वो 15 से 20 दिन काम करता है। बाकी या तो उड़ जाता है या फिर ज़मीन में रिस जाता है पौधे को थोडा बहुत ही मिलता है। लेकिन जो नैनों यूरिया का उपयोग करते हैं तो किसान को एक तो अधिक यूरिया नही डालना पड़ेगा। पौधा नैनों यूरिया को पूरा ग्रहण करता है। इससे मिटटी ख़राब नही होती है। इससे वायुमंडल भी स्वस्थ रहता है।
§ֆ:जो किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं वो किस समय पर मृदा की जांच करानी चाहिए ?
§ֆ:मिटटी की जांच के लिए जब किसानों के खेत खाली हो तभी किसानों को मिटटी जांच करानी चाहिए। वैसे तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खेत बहुत कम खाली रहते हैं, लेकिन किसानों को चाहिए की जब भी उनके खेत जून , सितम्बर या फिर किसी भी महीने में खाली रहे तो उनको चाहिए कि वो मिटटी की जांच अवश्य कराएँ। मिटटी परिक्षण इसलिए करना ज़रूरी है क्योंकि खेती में बहुत से पोषक तत्वों की कमी होती है। मिटटी की जांच कराने से हमें यह पता चल जाएगा की मिटटी में कितना कार्बन है, कितना नाईट्रोजन है, कितना पोटाश है।इसलिए मिटटी की जांच कराकर किसान अच्छी फसल पैदावार ले सकते हैं और इसी के साथ अपनी लागत को भी कम कर सकते हैं।
§खेती में मृदा स्वस्थ्य इतना अहम क्यों है, एक किसान के लिए यह जानना बहुत आवश्यक है। क्योंकि मिटटी के लिए सही पोषक तत्वों की जानकारी होना बहुत आवश्यक है। यह जानने के लिए फसल क्रांति की टीम ने कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और मृदा स्वस्थ्य की जानकारी रखने वाले डॉ। राकेश तिवारी से बात की पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश।

