ֆ:मिट्टीकी दशा सुधार एवं में जीवाणुओं की संख्या पर्याप्त मात्रा में सुनिश्चित करने के लिए एशियाडॉन बायो-केयर के डिकोडान का प्रयोग खेत में करना चाहिए। जिसके लिए एक निश्चित प्रक्रिया का उपयोग करते हैं सबसे पहले डिकोडान का बहुलीकरण करके उसे खेत में मिलाया जाता है जिसकी विधि निम्नवत है-
डिकोडान का बहुलीकरण
आवश्यक सामग्री
1. प्लास्टिक ड्रम क्षमता 200 लीटर-1
2. गुड बिना केमिकल -1.5 किलो ग्राम
3. चना दाल आटा अथवा बेसन-1.5 किलो ग्राम
4. पानी –200 लीटर (आवश्यक मात्रा में)
5. लकड़ी अथवा बांस का डंडा जिससे ड्रम के घोल को सुगमता हिलाया जा सके
6. डिकोडान – 1 किलो ग्राम
बहुलीकरण विधि:-
सर्वप्रथम 1.5 किलो ग्राम गुड़ एवं 1.5 किलो ग्राम चना दाल बेसन को अलग-अलग बर्तन में 5 लीटर जल में अच्छी प्रकार घोल लेते हैं। अब एक साफ प्लास्टिक के बर्तन में 5 लीटर जल में डिकोडान किसी लकड़ी की सहायता से घोलते हैं। इन तीनों घोल को धीरे-धीरे प्लास्टिक के बड़े ड्रम डालते हैं और आपस में लकड़ी की सहायता से मिलते हैं तथा ड्रम को लगभग 180 लीटर पानी भर देते हैं। इस घोल को घड़ी की दिशा में 5 मिनट दिन में 3-4 बार घूमते हैं। इस मिश्रण घोल को किसी जालीदार कपड़े से अथवा सूती कपड़े से ढक देते हैं।
खेत में डिकोडान को डालने के लिए निम्न विधियो का प्रयोग करते हैं
1. सिंचाई के जल के साथ खेत में प्रवाहित करते हैं
2. सड़ी हुई गोबर की खाद अथवा मिट्टी में मिलकर पूरे खेत में फैलाकर सिंचाई करना।
3. यदि खेत में पर्याप्त नमी हो और वर्षा की संभावना है तो डिकोडान घोल को मिट्टी अथवा गोबर खाद मिलकर पूरे खेत में फैला देते हैं।
4.
डिकोडान के प्रयोग से खेत में उपलब्ध जो भी सड़ने वाले पदार्थ हैं वह सड़के खाद के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं और ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा जाती है साथ में अन्य सूक्ष्म जीवों का विकास होता है जो कि हमारे खेत में नष्ट हो गए हैं और उनकी संख्या बहुत कम है जिससे फसल उत्पादन अच्छा प्राप्त होता है-
§वर्तमान समय में किसान अपनी जमीन में नियमित रासायनिक उर्वरक डालते हैं जिससे जमीन कड़क हो गई है और उसमें पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों की संख्या बहुत कम हो गई है । कुछ किसान भाई फसल कटाई के बाद सूखे पत्तों में आग लगा देते हैं और वह इस भ्रम में रहते हैं कि इसमें से कीट व्याधि काम हो जाएंगे तथा खरपतवार नष्ट होंगे परंतु यह उनका भ्रम है इसके साथ-साथ मिट्टी की ऊपरी सतह गर्म हो जाती है और पकी हुई ईंट के भांति व्यवहार करने लगती है जिसमें पोषक तत्व नष्ट होते हैं साथ में पाए जाने वाले जीवाणु जो कि हमारे पौधों के लिए बहुत जरूरी है वह भी नष्ट हो जाते हैं। किसान भाई गर्मी की जुताई करके खेत में गोबर की खाद डाल कर जुताई करते हैं, उन्हें या आभास नहीं होता है कि यह गोबर की खाद पूरी सड़ी नहीं है।

