सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्र माछिल के किसानों तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर (SKUAST-K) ने एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम ‘समग्र कृषि विकास कार्यक्रम’ (Holistic Agriculture Development Programme – HADP) के तहत परियोजना क्रमांक 15 (वर्षा आधारित क्षेत्र विकास) के अंतर्गत आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन ड्रायलैंड एग्रीकल्चर रिसर्च स्टेशन (DARS), रंगरेठ द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) कुपवाड़ा के सहयोग से किया गया, जिसमें माछिल क्षेत्र के ऊंचाई वाले गांवों से 60 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. एफ. ए. रैना ने किया। उन्होंने किसानों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य वर्षा आधारित और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और उच्च उत्पादकता वाली दलहनी फसलों की किस्मों को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर डॉ. अजाज अहमद लोन ने जलवायु-प्रतिरोधी फसलों और टिकाऊ कृषि तकनीकों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जो माछिल जैसे विशेष भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों के लिए आवश्यक हैं। KVK कुपवाड़ा और DARS के विशेषज्ञों ने किसानों के साथ खेत स्तर पर सीधी बातचीत की और उन्हें खेती में आ रही चुनौतियों के समाधान बताए।
विषय विशेषज्ञ डॉ. एम. ए. वानी और डॉ. शाहिद हकीम ने किसानों के साथ फसल प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की और दलहनी फसलों की उत्पादन तकनीकों से संबंधित पंपलेट भी वितरित किए। इसके साथ ही किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज भी प्रदान किए गए ताकि वे प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को तुरंत अमल में ला सकें।
कार्यक्रम के अंत में शोधकर्ताओं और किसानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने की अपील की गई, ताकि इस सीमावर्ती क्षेत्र में टिकाऊ और वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा दिया जा सके।यह पहल न केवल माछिल क्षेत्र के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी, बल्कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि के मॉडल के रूप में भी उभर सकती है।

