ने 9 अप्रैल 2025 को स्वीकृति दी थी। यह योजना किसानों को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने, जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने और जल उपभोक्ता समितियों (WUS) के माध्यम से भागीदारी आधारित जल प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
योजना के पायलट चरण में लगभग 75,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को अंडरग्राउंड पाइपलाइन सिंचाई प्रणाली (PPIN) से जोड़े जाने की योजना है। इसके लिए कुल ₹1600 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से ₹1100 करोड़ केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा। यह योजना मार्च 2026 तक क्रियान्वित की जाएगी। हालांकि अब तक इसके तहत कोई धनराशि जारी नहीं की गई है।
किसानों को मिलेंगे ये बड़े लाभ:
- फसल उत्पादन में वृद्धि: पाइपलाइन सिंचाई से सालभर सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे उपज में वृद्धि और अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी।
- फसल विविधीकरण: किसान अब उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती कर सकेंगे, जिससे आय के विविध स्रोत बनेंगे।
- स्थिर आय: नियमित और सुनिश्चित उत्पादन से किसानों की आमदनी में स्थिरता आएगी।
- ऊर्जा की बचत: सिंचाई के लिए डीज़ल या बिजली पंप की आवश्यकता समाप्त होगी, जिससे ऊर्जा खर्च में कमी आएगी।
- स्थानीय रोजगार के अवसर: PPIN सिस्टम की स्थापना और प्रबंधन के लिए ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन होगा।
- वैल्यू एडिशन और मार्केट एक्सेस: किसानों को प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बेहतर मार्केटिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे वे बेहतर कीमत प्राप्त कर सकेंगे।
जल उपभोक्ता समितियों (WUS) को मिलेगा सशक्तिकरण:
- प्रशासनिक भागीदारी: किसान योजना की योजना, क्रियान्वयन और संचालन में भागीदार होंगे।
- पानी का न्यायसंगत वितरण: WUS किसानों के बीच पानी का समान रूप से आवंटन सुनिश्चित करेगी।
- विवाद समाधान: जल उपयोग से संबंधित विवादों का समाधान समिति स्तर पर किया जाएगा।
- वित्तीय प्रबंधन: समितियाँ सिंचाई शुल्क का संग्रहण और परियोजना संचालन के लिए वित्तीय व्यवस्था संभालेंगी।
- तकनीकी प्रशिक्षण: किसानों को जल दक्ष खेती, फसल चयन और सिंचाई शेड्यूलिंग में प्रशिक्षित किया जाएगा।
- ₹50 लाख की एकमुश्त सहायता: प्रत्येक WUS को आर्थिक गतिविधियाँ प्रारंभ करने हेतु ₹50 लाख तक की सहायता राशि दी जाएगी।
आधुनिक तकनीक और समन्वित प्रयास:
- IoT आधारित सिंचाई प्रणाली: फसल स्तर पर 90% तक जल उपयोग दक्षता प्राप्त करने हेतु इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण: WUS के लिए ऑफिस व ट्रेनिंग भवन बनाए जाएंगे, जिनमें प्रदर्शनियां व कार्यशालाएं आयोजित होंगी।
- इंटीग्रेटेड जल स्रोत प्रबंधन: भूजल, सतही जल और पुनः उपयोग जल को एकीकृत कर सभी संबंधित विभागों को क्लस्टर स्तर पर जोड़ा जाएगा।
- भविष्य में PPP और 4P मॉडल: परियोजना के अंतर्गत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप व पब्लिक-प्राइवेट-पिपल पार्टनरशिप की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
लाभार्थियों की संख्या:
इस योजना से लगभग 80,000 किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे, जबकि लगभग 4 लाख किसान अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त करेंगे।

