֍:कृषि वैज्ञानिकों ने दी जानकारी§ֆ:इस अवसर पर डॉ. एन. सी. त्रिपाठी ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फसल अवशिष्ट मिट्टी में मिलने से कार्बनिक पदार्थ व अन्य तत्व बढ़ते हैं जिससे सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ जाती है मृदा का पीएच मान ठीक रहता है जिससे उर्वरकों की उपलब्धता अधिक समय तक रहता है। भूमि संरक्षण अधिकारी श्री आर.पी. राणा जी ने अंगीकृत ग्राम में कृषि विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रम को एवं फसल अवशिष्ट प्रबंधन परियोजना के लाभ एवं फसल अवशिष्ट जलाने से हानिकारक गैसो के बारे में जानकारी दी. प्रभारी राजकीय बीज भण्डार भावलखेड़ा ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के बारे में किसानों को जागरूक किया एवं उनकी समस्याओं का समाधान किया. नोडल अधिकारी डॉक्टर एन पी गुप्ता ने उन्नत कृषि यंत्रों द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना तथा बायो डी कंपोजर के बारे में विस्तार से जानकारी दी. डॉ महेश कुमार ने अंगीकृत ग्राम में सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सब्जियों की खेती एवं कीड़े एवं बीमारियों के बारे में चर्चा की। डॉ विमल कुमार ने फसलों में लगने वाले विभिन्न कीड़े बीमारियों तथा गेहूं की उन्नत प्रजातियों के बारे में जानकारी दी.§۩:Uploads/NewsImages/26-10-2024/bdpcZuXMti1xFsKjJfEj.jpg|§देशभर में किसानों को नई तकनीकों से अवगत कराने के लिए कृषि विभाग कई कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं. इसी क्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा भावलखेड़ा में आज फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ एनसी त्रिपाठी फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के नोडल अधिकारी डॉक्टर एन.पी गुप्ता, डॉक्टर महेश कुमार डॉक्टर विमल कुमार कृषि विभाग के भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. राणा प्रभारी राजकीय कृषि बीज भंडार भावलखेड़ा एवं अन्य कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी गण तथा पूर्व प्रधान राजवीर सिंह एवं वर्तमान प्रधान सहित 110 किसानों ने इस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया.

