ֆ:उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खरीफ सीजन 2025 के दौरान किसानों को खेती के लिए उत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत राज्य भर में प्रगतिशील किसानों को मोटे अनाज सहित धान, दलहन और तिलहन फसलों के बीजों की लगभग 4.58 लाख मिनी किट नि:शुल्क वितरित की जा रही हैं। इस पहल का उद्देश्य उन किसानों को प्रेरित करना है, जो बेहतर तकनीकों के साथ खेती कर सकते हैं और अन्य किसानों के लिए उदाहरण बन सकते हैं।
§ֆ:इन बीजों की विशेषता यह है कि ये रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता वाले होते हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार होता है। मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार और रागी की उपयोगिता स्वास्थ्य और पोषण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। एक समय में ये अनाज भारतीय भोजन का अहम हिस्सा थे और कम संसाधनों में भी अच्छी पैदावार देने के लिए जाने जाते थे। हरित क्रांति के बाद इनका प्रयोग भले ही घटा हो, लेकिन अब इनकी उपयोगिता और पोषण मूल्य को देखते हुए इन्हें दोबारा प्रमुखता दी जा रही है।भारत विश्व में मोटे अनाज के उत्पादन में अग्रणी है और अकेले बाजरे के उत्पादन में पहले स्थान पर है। उत्तर प्रदेश इसमें सबसे आगे है। 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित करने में भारत की प्रमुख भूमिका रही है, जिससे इस अनाज की वैश्विक स्तर पर पहचान और महत्ता को बल मिला है।
§ֆ:कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए देश के कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों ने उल्लेखनीय कार्य किया है। प्रगतिशील किसानों को दी जा रही मिनी किटों से उनकी उपज में वृद्धि तो हो ही रही है, साथ ही इससे गांवों में रोजगार और खाद्य सुरक्षा को भी बढ़ावा मिल रहा है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च हैदराबाद और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से न्यूट्री हब जैसे टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर्स की स्थापना की गई है, जो नए स्टार्टअप्स को आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
§ֆ:सरकार द्वारा अब तक मोटे अनाज की 150 से अधिक उन्नत किस्में विकसित की जा चुकी हैं, जो रोगों से लड़ने में सक्षम हैं और अधिक उपज देती हैं। साथ ही 500 से अधिक रेसिपी तैयार की जा चुकी हैं, जो इन अनाजों को रोज़मर्रा की जिंदगी में अपनाने को आसान बनाती हैं। बीजों को कृषि निवेश का आधार माना जाता है और यह उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की भूमिका निभाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार अब देश के सभी कृषि जलवायु क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष बीज पार्क स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।यह अभियान न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की पारंपरिक कृषि प्रणाली को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सहयोग से जोड़ने का एक प्रभावी प्रयास भी है।§

