नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की ओर से सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2025 का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने की। इस अवसर पर राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन भी मौजूद रहे।
इस बैठक में वाणिज्य विभाग, एमपीईडीए (मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी), ईआईसी (एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल), नाबार्ड, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और गुजरात के मत्स्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भारतीय सीफूड के वैल्यू एडिशन को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि वैश्विक बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत हो सके। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख कदमों जैसे सिंगल विंडो सिस्टम का विकास, हाई सीज़ और ईईजेड फिशिंग को बढ़ावा, और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एमपीईडीए को राज्यों के साथ मिलकर प्रजाति-विशेष निर्यात मानचित्रण और नए निर्यात अवसरों की पहचान करनी चाहिए।
राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने देश के विशाल मत्स्य संसाधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उपयोग कर निर्यात बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने नए बाजारों की पहचान और जोखिम प्रबंधन के लिए सामूहिक प्रयासों की अपील की। वहीं, श्री जॉर्ज कुरियन ने “वोकल फॉर लोकल” की अवधारणा पर बल दिया और घरेलू बाजारों को मजबूत कर मछुआरों और किसानों के लिए नए अवसर सृजित करने की बात कही।
मत्स्य सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बताया कि वर्तमान में भारत के केवल 10% सीफूड निर्यात में वैल्यू एडिशन होता है, जिसे 30–60% तक ले जाना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि निर्यात का 62% मूल्य व्हाइटलेग श्रिम्प पर निर्भर है, जबकि यह मात्रा के हिसाब से सिर्फ 38% है। उन्होंने पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस कम करने और टैरिफ-नॉन टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए विभागों के बीच समन्वय का आश्वासन दिया।
बैठक में उपस्थित हितधारकों ने कई सुझाव दिए, जिनमें वैल्यू एडिशन के लिए प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार, सरकारी प्रमाणन सहयोग को मजबूत करना, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, वैश्विक खरीदारों के साथ बी2बी लिंक स्थापित करना, और वित्तीय सहायता में सुधार शामिल था। नए निर्यात बाजारों के रूप में यूके, यूरोपीय संघ, ओमान, यूएई, दक्षिण कोरिया, रूस और चीन की पहचान की गई, विशेष रूप से दक्षिण कोरिया और मध्य पूर्व की मांग पर जोर दिया गया।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने प्रेस से बातचीत में हाल ही में अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न चुनौतियों और सरकार द्वारा उठाए जा रहे सक्रिय कदमों की जानकारी दी। उन्होंने मछली उत्पादन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और बाजार विविधीकरण में हालिया उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।

