पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय (MDoNER) और संचार मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने गुरुवार को संसद भवन एनेक्सी, नई दिल्ली में मंत्रालय से संबंधित परामर्शदात्री समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य पूर्वोत्तर के आठ ‘अष्टलक्ष्मी‘ राज्यों के लिए 10% सकल बजटीय सहायता (GBS) प्रावधान के तहत समन्वय को और अधिक मजबूत करना और क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करना था।
इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, जो DoNER और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े हैं, के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न सांसदों ने भी भाग लिया।बैठक में आपसी मंत्रालयीय समन्वय को मजबूत करने, शिकायत निवारण प्रक्रिया को तेज करने, और 10% GBS को धरातल पर प्रभावी विकास कार्यों में बदलने पर विशेष ध्यान दिया गया। श्री सिंधिया ने इस अवसर पर ‘विक्सित पूर्वोत्तर’ की परिकल्पना और भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति‘ को मूर्त रूप देने के लिए ‘सरकार के समग्र दृष्टिकोण’ की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री सिंधिया ने जानकारी दी कि वर्ष 2014 के बाद से 10% GBS की औसत उपयोगिता कई वर्षों में 104%, 112% और यहां तक कि 114% तक पहुंची है, जो उल्लेखनीय प्रगति का संकेत है। उन्होंने बताया कि जिन मंत्रालयों की प्रदर्शन में कमी है, उन्हें सटीक लक्ष्य निर्धारण और उच्च प्राथमिकता वाले विभागों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
उन्होंने उपस्थित सांसदों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावशाली और जरूरतमंद परियोजनाओं की पहचान करें ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि MDoNER मंत्रालय राज्यों, केंद्रीय मंत्रालयों और जनप्रतिनिधियों के बीच एक प्रभावशाली सेतु की भूमिका निभाता रहेगा।इस बैठक के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और यह प्रयास आने वाले समय में क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक प्रगति को और गति देगा।

