֍:111 लाख टन यूरिया की हुई बिक्री§ֆ:आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 111.14 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई. वहीं, एक साल पहले 98.13 लाख टन यूरिया बिका था. वहीं, डीएपी की बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई, जो 38.84 लाख टन से बढ़कर 40.13 लाख टन हो गई. एमओपी की बिक्री में भी 7.51 लाख टन और कॉम्प्लेक्स खीद की बिक्री 32.26 लाख टन से बढ़कर 47.19 लाख टन हो गई. ‘बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह विदेशों से आयात किए जाने वाले पोटाश पर भारत सरकार पहले ही सब्सिडी घटा चुका है, जिससे यह डीएपी से भी महंगा हो गया.§अक्टूबर से सितंहर तक रबी फसलों का पीक टाइम होता है. इस दौरान किसान भारी मात्रा में डीएपी और अन्य खादों की खरीद करते हैं. इसी कारण पिछले साल अक्टूबर के समय डिमांड बढ़ गई थी और डीएपी लगभग नहीं मिल रहा था. इसके लिए केंद्रों पर लंबी कतारें भी देखने मिली थी. एक्सेपर्ट्स की मानें तो खाद की बिक्री में यह बढ़त इसलिए हुई, क्योंंकि किसान आगामी खरीफ सीजन में खाद की कमी और उस समय होने वाली मारामारी में उलझना नहीं चाहते. इसके साथ ही कंपनियों ने भी ज्यादा से ज्यादा खाद बेचने पर जोर दिया.

