֍:आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष की निगाहें §ֆ:सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी ने जिस तरीके से आक्रामक होकर अपना रूप स्पष्ट किया है, वह भी दलितों की सियासत का आधार बना हुआ है। दरअसल बीते लोकसभा चुनाव में जिस तरीके से बहुजन समाज पार्टी का दलित वोट खिसका है, उससे पार्टी अपनी नई रणनीतियां बनाने पर मजबूर हो गई। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने तो बाकायदा उच्च पदों पर निकाले गए केंद्र सरकार के विज्ञापन को वापस लेने में अपनी पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका बताई। दरअसल मायावती इस मामले में दलित समाज को एक संदेश देने की कोशिश कर रही है कि केंद्र सरकार के उस विज्ञापन को रद्द करने में उन्होंने अपने समाज के हित की लड़ाई लड़ी है। सिर्फ मायावती ही नहीं, बल्कि अखिलेश यादव ने भी इस मामले में खुलकर बोलना शुरू किया। अखिलेश यादव ने उच्च पदों के मामले में रद्द किए गए विज्ञापन को पीडीए की जीत बताई। दरअसल सीधी भर्ती में विज्ञापन के अलावा सुप्रीम कोर्ट का आया एक महत्वपूर्ण फैसला भी सियासी दलों के लिए ऑक्सीजन बन गया। इस मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस लगातार अपना रुख स्पष्ट कर रहे हैं। इसके अलावा आगे के आंदोलन की रणनीति भी बना रहे हैं।
§आरक्षण मुद्दे पर सियासी धार देने के लिए राहुल गांधी 24 अगस्त को प्रयागराज में संविधान सम्मान सम्मेलन करने जा रहे हैं। इस दौरान कांग्रेस पार्टी सरकार को आरक्षण मुद्दे पर घेरने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत कहते हैं कि प्रयागराज में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के लाखों कार्यकर्ता पहुंच रहे हैं। उनका कहना है जिस तरीके से केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन दिया था, उससे भाजपा के मंसूबे साफ नजर आ रहे थे। कांग्रेस पार्टी ने लगातार इस पर दबाव बनाया और नतीजा हुआ कि भाजपा को यह भर्ती विज्ञापन रद्द करने पड़े। ऐसे ही मामलों को लेकर राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज में संविधान सम्मान सम्मेलन करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में किए जाने वाले इस सम्मेलन का पार्टी सीधे तौर पर दलितों पिछड़ों और में संदेश देना चाहती है।

