केंद्र सरकार पशुधन संवर्धन को लेकर गंभीर प्रयास कर रही है। 20वीं पशुधन गणना के अनुसार, भारत में ऊंटों की कुल संख्या 2,51,799, गधों की संख्या 1,22,899 और घोड़ों व टट्टुओं की संख्या 3,42,226 है।केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने वर्ष 2024 से ऊंट और गधों को राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के अंतर्गत शामिल कर लिया है। इस मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत, ब्रीडर फार्म स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार परियोजना लागत का 50% पूंजीगत अनुदान (अधिकतम ₹50 लाख) तक प्रदान कर रही है। इसमें आवास निर्माण, प्रजनन पशुओं की खरीद, बीमा, चारा उत्पादन की भूमि तैयारी तथा उपकरण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, ऊंट और गधे की नस्ल सुधार योजना के अंतर्गत, राज्यों को क्षेत्रीय सीमेन प्रयोगशालाओं, मूल प्रजनन फार्म, और ब्रीडर सोसायटी की स्थापना हेतु ₹10 करोड़ तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना में राज्य-केंद्र साझेदारी का अनुपात सामान्य राज्यों के लिए 60:40, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100% केंद्रीय सहायता निर्धारित की गई है।
लद्दाख से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आधुनिक परिवहन के बढ़ते उपयोग के कारण लद्दाखी गधों और ज़ांस्करी टट्टुओं की संख्या में चिंताजनक गिरावट आई है। इन पशुओं के संरक्षण हेतु लद्दाख पशुपालन विभाग ने सब्सिडी पर पेलेटेड चारा, ऊंटों के टैगिंग, शीरिंग मशीन, दवाओं की दुकानें, और ट्रैविस (Travis) जैसे सुविधाओं की व्यवस्था शुरू की है ताकि ऊंटों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा सके।
वहीं राजस्थान राज्य में ऊंटों के संरक्षण और विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत 2024-25 में प्रत्येक पशुपालक के एक ऊंट का बीमा किया गया था, जिसे 2025-26 में बढ़ाकर 10 ऊंट प्रति पशुपालक कर दिया गया है। इसके अलावा, राज्य सरकार प्रत्येक ऊंट के बच्चे के जन्म पर ऊंट पालक को ₹20,000 की वित्तीय सहायता दे रही है। ऊंटों की बीमारी की पहचान और इलाज हेतु तिमाही शिविर, नि:शुल्क दवा योजना, तथा ऊंटों के वध पर रोक के लिए राजस्थान ऊंट संरक्षण अधिनियम, 2015 लागू है।
ऊंट के दूध को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) और पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF) जैसे योजनाओं के तहत ऊंट दूध के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को शामिल किया गया है। राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) ने बहुला फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया है, जिसके तहत ऊंट का पैक्ड दूध बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है।
ऊंट पालकों की आजीविका सुधारने के लिए तीन दूध संग्रहण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां से दूध लेकर पैक्ड दूध और बिस्किट तैयार किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, कच्छ की सरहद डेयरी को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ₹2.65 करोड़ की सहायता मिली है ताकि ऊंट के दूध का संग्रहण, चिलिंग और प्रसंस्करण किया जा सके।

