वर्षा आधारित खेती को सशक्त और टिकाऊ बनाने के लिए “रेनफेड क्षेत्रों के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र (एनएएससी), नई दिल्ली में किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय रेनफेड क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) प्रभाग और ‘रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर नेटवर्क‘ (आरआरए नेटवर्क) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस कार्यशाला का उद्घाटन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी की उपस्थिति में हुआ। इस दौरान एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पी.के. मेहरड़ा समेत अनेक विषय विशेषज्ञों की भागीदारी रही, जिनमें डॉ. सुसमा सुधीश्री (वाटरशेड विकास विशेषज्ञ), डॉ. ए.के. मिश्रा (जल प्रबंधन विशेषज्ञ), डॉ. पंकज के. शाह (निदेशक – कृषि एवं बागवानी), डॉ. एस.डी. सिंह (वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार – एग्रोफॉरेस्ट्री) और डॉ. सब्यसाची दास (राष्ट्रीय समन्वयक, आरआरए नेटवर्क) प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यशाला में प्रमुख विषयों पर मंथन
तकनीकी सत्रों में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें शामिल थे:
- एग्रोफॉरेस्ट्री के मॉडल और सामुदायिक अनुभव
- नीति संबंधी चुनौतियां और समाधान
- सरकारी योजनाओं में अभिसरण (कन्वर्जेंस)
- उद्योग से जुड़ाव और किसानों की वित्तीय पहुंच
विशेषज्ञों ने वर्षा आधारित पारिस्थितिक तंत्र में एग्रोफॉरेस्ट्री की भूमिका को टिकाऊ कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इस दिशा में समुदाय-आधारित योजना, क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप समाधान और बहु-हितधारकों के सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।
आगे की रणनीतिक दिशाएं
कार्यशाला में निम्नलिखित प्रमुख रणनीतियां अपनाने की सिफारिश की गई:
- कार्बन क्रेडिट के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना
- संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र आधारित योजना अपनाना — केवल पेड़ों तक सीमित न रहना
- एक समर्पित कार्य समूह के माध्यम से योजनाओं में संस्थागत समन्वय स्थापित करना
- स्थानीय स्तर पर नियमों और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन स्थापित कर प्रतिबंधों में सुधार लाना
- नीचे से ऊपर की योजना बनाकर भूमि क्षरण को रोकने के प्रयास तेज करना
सामूहिक सहयोग की आवश्यकता
कार्यशाला का समापन इस मजबूत सहमति के साथ हुआ कि एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए नीति सुधार, संस्थागत तालमेल और नवाचार आधारित ज्ञान मंचों की अत्यधिक आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि इन रणनीतियों को लागू किया जाए तो रेनफेड कृषि क्षेत्रों में स्थायी और लाभदायक कृषि प्रणाली विकसित की जा सकती है।
यह कार्यशाला देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों, योजनाकारों और नीति निर्माताओं के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास साबित हुई।

