देश में रक्षाबंधन सहित आने वाले त्योहारी सीजन को लेकर चीनी की आपूर्ति पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि उद्योग जगत का कहना है कि त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। भारत में त्योहारों के दौरान मिठाइयों की खपत काफी बढ़ जाती है, चाहे वह घर पर बनी मिठाइयाँ हों या बाजार से खरीदी गई मिठाई।
चीनी स्टॉक की वर्तमान स्थिति
31 जुलाई तक चीनी मिलों के पास 90.58 लाख टन चीनी का स्टॉक था, जिसमें से सरकार ने 22.5 लाख टन घरेलू बाजार में बिक्री के लिए आवंटित किया था। इस हिसाब से अगस्त के अंत तक चीनी मिलों के पास लगभग 68 लाख टन का स्टॉक शेष रह सकता है। पिछले साल की तुलना में इस साल का स्टॉक कम है – पिछले साल अगस्त में 22 लाख टन और सितंबर में 23.5 लाख टन बिक्री के लिए आवंटित किया गया था।
आपूर्ति को लेकर चिंताएँ
2024-25 सीजन में चीनी का शुद्ध उत्पादन घटकर 261 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत लगभग 280 लाख टन है। 30 जून को चीनी का राष्ट्रीय समापन स्टॉक 112 लाख टन था और जुलाई के लिए 22 लाख टन का कोटा आवंटित किया गया था। रक्षाबंधन से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन से पहले मांग में वृद्धि के कारण जुलाई के कोटे की लगभग पूरी मात्रा बिक चुकी है।
उद्योग का पक्ष
बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने 31 जुलाई को कहा कि त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उपलब्धता पर्याप्त है। इसका कारण 52 लाख टन का कैरीफॉरवर्ड स्टॉक है और नवंबर से ताजा उत्पादन आना शुरू हो जाएगा। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने अनुमान जताया है कि 2024-25 में सकल उत्पादन 349.01 लाख टन हो सकता है, जो 295.07 लाख टन से 18% अधिक है।
त्योहारों और मिठाइयों का महत्व
भारतीय संस्कृति में त्योहारों और मिठाइयों का गहरा संबंध है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर पारंपरिक मिठाइयाँ जैसे केसर पेड़ा, नारियल के लड्डू, चॉकलेट बर्फी और तिल गुड़ के लड्डू बनाने की परंपरा है 39। दीवाली पर गुलाब जामुन, जलेबी, बर्फी और लड्डू जैसी मिठाइयाँ बनाई और बाँटी जाती हैं 24। मिठाइयाँ न केवल स्वाद के लिए बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी रखती हैं।
निष्कर्ष
हालांकि चीनी के स्टॉक में पिछले साल की तुलना में कमी देखी जा रही है, लेकिन उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध होगी। सरकार और उद्योग दोनों ही इस बात को सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं कि भारत के प्रमुख त्योहारों के दौरान मिठाइयों की परंपरा बिना किसी रुकावट के जारी रहे।