֍:किसानों को इन बातों का रखना होगा ख्याल§ֆ:इसलिए किसानों को चाहिए कि वो ज्यादा से ज्यादा साहीवाल गाय ही पालें. जिससे की साहीवाल गाय के दूध का ज्यादा मात्रा में उत्पादन हो सके. इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि साहीवाल गाय के दूध की अलग से पैकिंग हो सकेगी और लोगों तक उनकी डिमांड के मुताबिक बिना किसी दूसरी नस्ल की गाय के दूध की मिलावट किए प्योर दूध ग्राहकों को मिल सकेगा.
§֍:डेयरी का पीक टाइम है आने वाले 40 साल§ֆ:किसान डेयरी समिट के दौरान इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आरएस सोढ़ी ने कहा कि डेयरी सेक्टर देश की आर्थिक स्थिति में बड़ा योगदान देता है. अगर डेयरी के भविष्य की बात करें तो आने वाले 40 से 45 साल डेयरी कारोबार के लिए पीक टाइम साबित होंगे. साथ ही उन्होंने डेयरी किसानों को अधिक पशु पालने, पशुओं की देखभाल करने, अच्छा चारा उपलब्ध कराने और अधिक अच्छी गुणवत्ता वाले दूध का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया. उनका कहना है कि दूध की क्वालिटी सुधरने से एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा.
§֍:गायों की नस्ल बढ़ाने और साइलेज पर भी हुई चर्चा §ֆ:समिट में मेहमानों ने वेरका डेयरी की हुसैनीवाला बॉर्डर यूनिट को भी देखा. जहां महिला कर्मचारियों ने उनका स्वागत किया. इस दौरान मेहमानों को बताया गया कि कैसे दूध की सभी तरह की जांच करने के लिए करोड़ों रुपये की कीमत वालीं हाईटेक मशीनें खरीदी गई हैं. इस मौके पर वेरका के लिए मंजूर हुईं करोड़ों रुपये की परियोजनाओं से जुड़ी एक बुकलेट मिल्क फेड मिल्कफेड (वेरका) के एमडी कमल कुमार गर्ग (आईएएस) को सौंपी गई. §कम चारा खाकर ज्यादा दूध देने वाली गाय की नस्ल अगर कोई है तो वो साहीवाल है. ये कहना है एनीमल एक्सपर्ट और संयुक्त रजिस्ट्रार फिरोजपुर उमेश कुमार का. 31 जनवरी को वेरका फिरोजपुर डेयरी (मिल्कफेड पंजाब) और इंडियन डेयरी एसोसिएशन (पंजाब यूनिट) ने संयुक्त रूप से दा किसान डेयरी समिट का आयोजन किया था. इस मौके पर उमेश कुमार ने बताया कि आज पंजाब में साहीवाल गाय खूब पाली जा रही हैं. इसकी खास वजह ये है कि कम चारा खाने के बाद भी ये ज्यादा दूध देती हैं. साहीवाल नस्ल की गाय के दूध में भरपूर प्रोटीन होता है, जो कई तरह के रोगों से बचाता है.

