֍:हरियाणा मॉडल पर चल रहा पंजाब §ֆ:
फसल विविधीकरण अपनाएं, पंजाब का पानी बचाएं…इस नारे के साथ सीएम भगवंत मान ने स्कीम की शुरुआत की है. जो किसान धान की खेती छोड़कर वैकल्पिक फसलों की ओर जाएंगे उन्हें प्रति एकड़ 7,000 रुपये दिए जाएंगे. इसके लिए अधिकतम 12.5 एकड़ तक की लिमिट फिक्स कर दी गई है. यानी क्रॉप डायवर्सिफिकेशन के लिए एक किसान को अधिकतम 87,500 रुपये की मदद मिल
सकती है.
§֍:खेती के तौर- तरीकों को बदलने की जरुरत §ֆ:राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि प्रोत्साहन राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए इस मद में सरकार ने 289.87 करोड़ के फंड का इंतजाम किया है. राज्य सरकार चाहती है कि किसी भी तरह से भू-जल का दोहन कम किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचा रहे. इसके लिए धान की खेती कम करने, खेती का तौर-तरीका बदलने और ऐसी किस्मों की रोपाई पर जोर दिया जा रहा है जिसमें पानी की खपत कम लगती है.
§֍:केंद्र ने पंजाब को दी थी सलाह §ֆ:केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 18 जुलाई को नई दिल्ली के कृषि भवन में पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां के साथ हुई बैठक में कहा था कि पंजाब सरकार को भू-जल बचाने की ओर ध्यान देने की जरूरत है. पानी बचाने के लिए क्रॉप डायवर्सिफिकेशन करने की जरूरत है, वरना पानी पाताल में चला जाएगा. इसके बाद राज्य सरकार यह स्कीम लेकर आई है. सरकार को उम्मीद है कि प्रोत्साहन की रकम की वजह से किसान धान की खेती छोड़ेंगे. §Agriculture News: धान की बढ़ती खेती पंजाब के लिए समस्या बनती जा रही है. इसकी वजह से वहां पर जल संकट गहरा गया है. अब यह बात सरकार को भी समझ में आने लगी है. ऐसे में अब खेती के जरिए पानी बचाने की मुहिम शुरू की गई है. इसी कड़ी राज्य सरकार क्रॉप डायवर्सिफिकेशन के लिए एक योजना लेकर आई है. इसके तहत राज्य में धान की खेती छोड़ने वाले किसानों को 7000 रुपये प्रति एकड़ की दर से मदद दी जाएगी. भू-जल बचाने का यह हरियाणा मॉडल है. हरियाणा में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार के पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ नाम से ऐसी ही योजना शुरू की थी. पंजाब ने भी अब हरियाणा के रास्ते पर चलने का फैसला किया है.

