֍:किसानों ने लगाया आरोप§ֆ:किसानों ने दावा किया कि उन्हें जे-फॉर्म के बजाय “कच्ची पर्ची” जारी की गई. किसान कुलवंत ने ‘दि ट्रिब्यून’ से कहा, “हालांकि हमें अपने खाते में भुगतान मिलता है, लेकिन बाकी सब कुछ आढ़तिये करते हैं. अगर हमें अतिरिक्त भुगतान मिलता है, तो हम इसे कमीशन एजेंटों (आढ़तिये) को नकद में वापस कर देते हैं.” §֍:प्रशासन ने दिया जवाब§ֆ:किसानों की समस्या को लेकर एसडीएम ने कहा, “हमने किसानों से कहा है कि अगर इस तरह की कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो इस तरह की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. हर चीज की जांच की जा रही है. अभी तक मुझे कोई गड़बड़ी नहीं मिली है.” §पंजाब के जालंधर में गांव के किसान फसल को समर्थन मूल्य से नीचे बेचने पर मजबूर ह गए हैं. इसको लेकर किसानों का कहना है कि धान के उठान में देरी हुई. बाद में सरकारी एजेंसियों या मंडियों में धान बेचने के बजाय निजी व्यापारियों को बेच रहे हैं. कई गावों के किसानों ने इसको लेकर चिंता जाहिर की है. कई किसानों ने दावा किया कि सरकारी एजेंसियों द्वारा धान की खरीद नहीं किए जाने और उठान नहीं होने के कारण उन्होंने अपनी धान की उपज निजी व्यापारियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेची है.

