एक छत के नीचे 7 मंत्रालय
कर्तव्य भवन-3 में निम्नलिखित मंत्रालय और विभाग शिफ्ट होंगे:
- गृह मंत्रालय
- विदेश मंत्रालय
- ग्रामीण विकास मंत्रालय
- एमएसएमई मंत्रालय
- कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय
भवन की प्रमुख विशेषताएं
विशाल परिसर: 1.5 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला यह भवन दो बेसमेंट और 7 मंजिलों (ग्राउंड फ्लोर सहित) वाला है।
कॉन्फ्रेंस सुविधाएं
- 24 बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल (45 लोगों की क्षमता)
- 26 छोटे कॉन्फ्रेंस हॉल (25 लोगों की क्षमता)
- 67 मीटिंग रूम (9 लोगों की क्षमता)
- 600 वाहनों की पार्किंग
- 27 लिफ्ट और 2 स्वचालित सीढ़ियां
- योगा रूम, क्रेच, मेडिकल रूम, कैफेटेरिया
हरित प्रौद्योगिकी:
- 5.34 लाख सोलर पैनल
- वर्षा जल संचयन प्रणाली
- GRIHA-4 रेटिंग के लक्ष्य के साथ निर्मित
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का महत्व
कर्तव्य भवन-3 सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनने वाली 10 कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट इमारतों में से पहली है। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली में फैले विभिन्न मंत्रालयों को एक स्थान पर लाकर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है।
शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार, कर्तव्य भवन-1 और 2 का निर्माण भी अगले महीने तक पूरा हो जाएगा। पूरी परियोजना पर लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नॉर्थ-साउथ ब्लॉक का भविष्य
मंत्रालयों के कर्तव्य भवन में शिफ्ट होने के बाद नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे-युगीन भारत’ संग्रहालय में बदल दिया जाएगा। इस संग्रहालय में महाभारत काल से लेकर आधुनिक भारत तक के इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा।
इस नए भवन के साथ ही केंद्र सरकार के प्रशासनिक कार्यों में अधिक सुव्यवस्था और पारदर्शिता आने की उम्मीद है। यह परियोजना 2027 तक पूरी तरह से पूरी हो जाएगी।

