दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक बन रहे फरीदाबाद-जेवर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के किनारे एक बड़े औद्योगिक शहर को विकसित करने की योजना पर सरकार ने तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसके लिए फरीदाबाद और पलवल के नौ गांवों से लगभग 9,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। यह परियोजना हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) द्वारा क्रियान्वित की जाएगी।
1. जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया:
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सरकार ने पारंपरिक अधिग्रहण के बजाय सीधे किसानों से जमीन खरीदने का निर्णय लिया है
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इच्छुक किसानों को 31 अगस्त 2025 तक ebhoomi.jamabandi.com.nic.in पोर्टल पर आवेदन करना होगा।
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केवल आवेदन करने वाले किसानों की जमीन ही सरकार द्वारा खरीदी जाएगी
2. प्रभावित गांव:
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एक्सप्रेसवे किनारे के गांव: फरीदाबाद के छांयसा और मोहना गांव (जो फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे के मार्ग पर स्थित हैं), पलवल के मोहियापुर, बागपुर कलां, बागपुर खुर्द, बहरौला, हंसापुर, सोलड़ा और थंथरी गांव शामिल है।
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नए सेक्टरों के लिए गांव: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा ग्रेटर फरीदाबाद के 18 गांवों से 4,500 एकड़ जमीन ली जाएगी, जिनमें खेड़ी कलां, नचौली, ताजुपुर आदि शामिल हैं।
3. विकास योजना:
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HSIIDC द्वारा एक बड़े औद्योगिक शहर का विकास
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हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टर-94ए, 96, 96ए, 99 से 103 तक और 140 से 142 तक नए सेक्टर विकसित किए जाएंगे
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फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे (31.425 किमी लंबा) के पूरा होने के बाद यह क्षेत्र प्रमुख विकास केंद्र बनेगा।
4. आर्थिक प्रभाव:
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जमीन की कीमतों में भारी उछाल की संभावना
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2005 में नहरपार के 19 गांवों में आर जोन की घोषणा के बाद जमीन की कीमतें 2-3 करोड़ प्रति एकड़ तक पहुंच गई थी
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बिल्डर्स और रियल एस्टेट डेवलपर्स की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद
5. कनेक्टिविटी लाभ:
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फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे से फरीदाबाद और नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच की दूरी 90 किमी से घटकर 31 किमी रह जाएगी।
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यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख राजमार्गों से जुड़ेगा।
फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे परियोजना भारतमाला परियोजना के तहत विकसित की जा रही है जिसकी कुल लागत 2,414.67 करोड़ रुपये है। इस छह-लेन वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण 22 जून 2023 को शुरू हुआ था और यह 20 जून 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है 1। परियोजना के पूरा होने के बाद यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का एक प्रमुख औद्योगिक और आवासीय केंद्र बन सकता है।
इस विकास योजना से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हालांकि, जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

