ֆ:कर्नाटक के कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार बुवाई समय पर और अधिक क्षेत्र में हो रही है, जिससे उत्पादन में वृद्धि की संभावना है। वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग, बेंगलुरु और कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र ने चेतावनी दी है कि जून के पहले सप्ताह में 6 से 10 दिनों का मानसून ब्रेक आ सकता है। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने किसानों को बुवाई न करने की कोई चेतावनी नहीं दी है, जैसा कि महाराष्ट्र सरकार ने किया है।§ֆ:खरीफ सीजन (जून से सितंबर) के दौरान राज्य ने कुल 82.50 लाख हेक्टेयर में फसल बोने का लक्ष्य रखा है। यदि बारिश अच्छी रही और जलाशय भर गए, तो रबी सीजन (अक्टूबर-दिसंबर) में 25.50 लाख हेक्टेयर में खेती की जाएगी।§ֆ:खरीफ फसलों का विस्तृत लक्ष्य इस प्रकार है:
• अनाज: 35.74 लाख हेक्टेयर
• दालें: 23.03 लाख हेक्टेयर
• तेल बीज: 5.62 लाख हेक्टेयर
• व्यावसायिक फसलें (कपास – 7.90 लाख हेक्टेयर, गन्ना – 6.51 लाख हेक्टेयर): कुल 15.12 लाख हेक्टेयर
इस बार अरहर दाल (तूर) की बुवाई में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। इस वर्ष इसका लक्ष्य 16.80 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष से 1.80 लाख हेक्टेयर अधिक है। वहीं धान की बुवाई लगभग पिछले साल के समान, 10.60 लाख हेक्टेयर, रहने की संभावना है।
§कर्नाटक में इस वर्ष समय से पहले दस्तक देने वाले मानसून और प्रचुर प्री-मानसून बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है। मई के तीसरे सप्ताह में ही राज्य में 2.86 लाख हेक्टेयर भूमि पर खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि सामान्य वर्षों में मई के अंत तक यह आंकड़ा 2.81 लाख हेक्टेयर रहता है।

