ֆ:पशुपालन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह बढ़ती संख्या इस ओर संकेत करती है कि लोग पारंपरिक पशुपालन से हटकर अब मुर्गी पालन जैसे व्यवसायिक और कम जोखिम वाले विकल्पों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। ब्रॉयलर और लेयर मुर्गियों की मांग में बढ़ोत्तरी ने भी इस प्रवृत्ति को गति दी है।
§ֆ:पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. गुरदित सिंह के अनुसार पोल्ट्री पालन में वृद्धि के पीछे कई अहम कारण हैं। पिछले कुछ वर्षों में किसी बड़ी पक्षी बीमारी का प्रकोप नहीं देखने को मिला है, जिससे इस व्यवसाय में स्थायित्व बना रहा। इसके अलावा, अंडों के दाम लगातार अच्छे बने रहे, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिला। साथ ही, कॉन्ट्रैक्ट पोल्ट्री फार्मिंग जैसे मॉडल ने इस क्षेत्र को एक नई दिशा दी है।
§ֆ:कॉन्ट्रैक्ट पोल्ट्री फार्मिंग में कंपनियां किसानों को दाना, दवाइयां, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराती हैं, जबकि किसान जमीन, श्रम और जरूरी सुविधाएं मुहैया कराते हैं। बदले में किसान को तयशुदा रकम या मुनाफे में हिस्सा मिलता है। इस मॉडल ने छोटे और मध्यम स्तर के किसानों को भी मुर्गी पालन के प्रति आकर्षित किया है।
§ֆ:राज्य के पशुपालन मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार बीते पांच वर्षों में पोल्ट्री पालन में यह तेजी इस बात का संकेत है कि किसान अब खेती के साथ-साथ वैकल्पिक आय के स्रोतों को भी अपनाने लगे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्य में गाय और भैंसों की संख्या में गिरावट एक चिंता का विषय है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार पारंपरिक पशुपालन को पुनर्जीवित करने के लिए नई योजनाएं शुरू करेगी और व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएगी।
§ֆ:पंजाब में पोल्ट्री पालन की यह तेजी न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो रही है, बल्कि यह ग्रामीण युवाओं और छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम है।
§पंजाब में पोल्ट्री पालन को लेकर एक आंकड़ा सामने आया है। 21वीं पशुधन जनगणना की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार राज्य में मुर्गियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2019 में हुई 20वीं जनगणना में जहां राज्य में कुल पोल्ट्री की संख्या 1.76 करोड़ थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 3.57 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इस वृद्धि को विशेषज्ञ एक बड़ी आर्थिक और सामाजिक बदलाव की ओर इशारा मान रहे हैं।

