ֆ:उन्होंने बताया कि आलू हमारे दैनिक भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। प्रदेश में पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 900 हेक्टेयर भूमि पर तथा मैदानी क्षेत्रों में 2,000 हेक्टेयर में आलू की खेती की जा रही है। मैदानी इलाकों में कुफरी सिंदूरी, कुफरी बादशाह, कुफरी पुखराज, कुफरी सूर्या, चिप्सोना प्रथम और ख्याति जैसी किस्में उगाई जा रही हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में कुफरी ज्योति, कुफरी हिमालिनी, कुफरी हिमसोना और कुफरी चंद्रमुखी का उत्पादन हो रहा है।§ֆ:निदेशक ए.एस. रीन ने किसानों को बेहतर पैदावार के लिए आलू ट्रांसप्लांटर जैसी मशीनीकृत तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने किसानों को जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की भविष्य की चुनौतियों के प्रति सजग रहते हुए वैज्ञानिक व जलवायु-अनुकूल खेती पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।§ֆ:उन्होंने युवा किसानों और कृषि उद्यमियों से समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) के तहत उन्नत आलू उत्पादन और प्रसंस्करण इकाइयों में नए अवसरों को तलाशने का आग्रह किया, जिससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।§आलू अब न केवल किसानों की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। किसान अब इसकी खेती में गहरी रुचि दिखा रहे हैं और बाजार में इसकी बिक्री से बेहतर आय भी अर्जित कर रहे हैं। यह बात अंतरराष्ट्रीय आलू दिवस के अवसर पर कृषि निदेशालय द्वारा आयोजित सेमिनार में कृषि निदेशक ए.एस. रीन ने कही।

