֍:आलू की फसल को नुकसान§ֆ:यूपी के मथुरा जिले में स्थित भूरेका गांव क एक किसान ने बताया कि उनके जिले के साथ आगरा, मथुरा जैसे जिलों में हजारों हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है. आलूभी इन दिनों खुदाई के दौर से गुजर रहा है. इसे सुखाने के बाद ही बाजार में भेजा जाता है. ऐसे में रात की बारिश ने आलू की खुदाई को प्रभावित कर दिया है. बारिश से आलू भीग गए और अब किसानों को यह चिंता है कि अगर खेत में पानी भरा तो आलू सड़ने लगेगा. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की संभवना है.§֍:किसानों की बढ़ी चिंता§ֆ:मौसमी बदलाव का सबसे हड़ा असर किसानों की मान्सिक स्थिति पर पड़ा है. रातभर की चिंता और मौसम की अनिश्चितता ने किसानों के मन में डर और असमंजस का माहौल बना दिया है. आलू, सरसों और गेहूं की फसलों के लिए यह मौसम एक चुनौती साबित हो सकता है. आलू अनुसंधान केंद्र मेरठ क प्रमुख राजेश कुमार सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि अगर खेतों में पानी भरने का खतरा हो, तो खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करें, ताकि आलू सड़ने से बच सकें. अगर नमी अधिक रहती है, तो कोल्ड स्टोरेज में भी आलू में रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. §उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बुधवार औ र गुरुवार रात बदलते मौसम के चलते बारिश शुरु हो गई. इस दौरान कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई. जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी. इनमें आलू, मटर, सरसों के क्षेत्रों में किसानों को भआरी नुकसान की आशंका है. बेमौसम बिरश और ओलावृष्टि ने किसानों की नींद उड़ा दी है. हालांकि, गेहूं किसानों के लिए बारिश का होना अच्छा माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि फसल बचाने के लिए जरूरी कार्य जल्द कर लें.

