#WATCH | Ladakh: PM Narendra Modi says, "Pakistan has failed in all its nefarious attempts in the past. But Pakistan has not learned anything from its history. It is trying to keep itself relevant with the help of terrorism and proxy war. Today I am speaking from a place where… pic.twitter.com/HQbzjcVKVq
— ANI (@ANI) July 26, 2024
§֍:लद्दाख पहुंचे पीएम मोदी §ֆ:इसके बाद पीएम मोदी ने लद्दाख के द्रास में कारगिल वॉर मेमोरियल का भी दौरा किया. बता दें कि द्रास केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल जिले में बसा कस्बा है. इसे लद्दाख का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. पीएम मोदी से पहले आर्मी चीफ ने द्रास में शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी.
#WATCH | Ladakh: PM Narendra Modi says, "Today, this great land of Ladakh is witnessing the 25th anniversary of Kargil Vijay Diwas. Kargil Vijay Diwas tells us that the sacrifices made for the nation are immortal…" pic.twitter.com/0PddS6diyk
— ANI (@ANI) July 26, 2024
§֍:26 जुलाई को मनाया जाता है कारगिर दिवस §ֆ:हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है. लेकिन इस बार कारगिल दिवस की रजत जयंती (25 साल) होने के कारण यह कार्यक्रम खास है. इसमें बड़ी संख्या में कारगिल युद्ध के दौरान अपने प्राण न्यौछावर करने वाले बहादुरों के परिजन, वीरता पुरस्कार विजेता और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
#WATCH | Ladakh: Visuals from Kargil War Memorial in Drass.
— ANI (@ANI) July 26, 2024
Prime Minister Narendra Modi will visit here today to pay tribute to the heroes of the Kargil War on the occasion of 25th #KargilVijayDiwas2024. pic.twitter.com/mF589y4nAh
§֍:क्यों मनाया जाता है कारगिल दिवस?§ֆ:बता दें कि पाकिस्तान के साथ हुई कारगिल जंग 3 मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक लड़ी गई थी. 26 जुलाई को भारतीय सेना ने जीत हासिल की थी. तब से इस तारीख को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है. 1999 से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ था कि दोनों ही देश के सैनिक सर्दियों में उन इलाकों में अपने जवानों की तैनाती नहीं करेंगे, जहां पर बर्फ जमा होगी.§प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25वें कारगिल विजय दिवस पर द्रास में शहीदों को श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम के लिए पीएम मोदी कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचे और 1999 में भारत-पाकिस्तान की जंग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर जवानों को याद किया.

