֍:क्यों है भारत के लिए जरूरी?§ֆ:लाओस की बात करें तो यहां की कुल आबादी 77 लआख के आसपास है. यह दक्षिण पूर्व एशिया में एकमात्र लैंडलॉक देश है. ये देश इसलिए अहम है क्योंकि लाओस की सीमा उत्तर-पश्चिम में म्यांमार और चीन, पूर्व में वियतनाम, दक्षिण-पूर्व में कंबोडिया और पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में थाईलैंड से लगती है. चीन और म्यांमार से घिरे होने के कारण भारत के लिए इस देश की रणनीतिक महत्ता बढ़ जाती है. दरअसल, दक्षिण पूर्व एशिया में अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, लाओस हमेशा से व्यापारिक नजरिए से भी अहम रहा है. इसी वजह से फ्रांस और जापान ने कब्जा जमाया. 1953 में जब लाओस को आजादी मिली तो चीन ने भी लाओस में अपने प्रभाव को आजमाना शुरू किया. §֍:कब भारत से जुड़ा लाओस?§ֆ:भारत से लाओस अपनी आजादी के 3 साल बाद यानि फरवरी 1956 में जुड़ा. भारत ने लाओस की रणनीतिक जरूरत को देखते हुए संबंध स्थापित किए थे. दरअसल, दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती विस्तारवादी नीतियों के चलते भारत लाओस को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है. §֍:लाओस ने भारत का दिया खुलकर साथ§ֆ:लाओस और भारत के जुड़े रहने के कई उदाहरण हैं. इस देश ने भारत का हमेशा खुलकर साथ दिया है. लाओस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के भारत के प्रयासों का समर्थन करता रहा है. राम मंदिर उद्घाटन के वक्त भी लाओस ने राम लला पर एक डाक टिकट जारी किया था. ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश था. कोरोना के समय भी भारत ने लाओस की मदद की थी. जिसकी लाओस की ओर से खूब तारीफ की गई थी.§प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को लाओस के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए हैं. इस दौरान वे 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे. लाओस आसियान की अध्यक्षता कर रहा है. भारत के लिए पीएम मोदी का लाओस की यात्रा पर जाना आकिर क्यों इताना जरूरी है जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर…

